मोबाइल फोन जैसे डिजिटल डिवाइस आज के दौर में हमारी जिंदगी का जरूरी अंग बन चुके हैं। बच्चों से लेकर बूढ़े तक मोबाइल का यूज कर रहे हैं। हालांकि, छात्रों के बीच बढ़ते मोबाइल फोन यूज को लेकर चिंता जताई जा रही है। खासतौर पर तब, जब छात्र क्लासरूम में भी इसका इस्तेमाल करने लगें। यही वजह है कि अमेरिकी शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी स्कूलों से छात्रों के बीच मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर नियम बनाने को कहा है।
शिक्षा मंत्रालय ने ये भी कहा है कि नियम बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर होने चाहिए। मंत्रालय इस बात को भली-भांति जानता है कि छात्रों के बीच मोबाइल का इस्तेमाल आम बात हो चुकी है। इससे उनका पढ़ाई से ध्यान भटकता है और सेहत पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि उसने एक नया डॉक्यूमेंट जारी किया है, जिसका नाम ‘प्लानिंग टुगेदर: अ प्लेबुक फॉर स्टूडेंट पर्सनल डिवाइस पॉलिसीज’ है। इसमें मोबाइल पॉलिसी बनाने के तरीके बताए गए हैं।
किन बातों का ख्याल रखे बने पॉलिसी?
अमेरिकी शिक्षा मंत्रालय की तरफ से साफ किया गया है कि स्कूलों की जरूरतों के हिसाब से मोबाइल के इस्तेमाल के एक नियम हर जगह लागू नहीं किए जा सकते हैं। इस वजह से नियम बनाने से पहले सभी से बात करना जरूरी है। हालांकि, स्कूलों को नियम बनाते वक्त इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उनकी सुरक्षा और पढ़ाई पर इसका असर दिखे। साथ ही साथ साइबरबुलिंग, लत और मानसिक परेशानियों जैसी दिक्कतों को भी ध्यान रखकर नियम बनाना चाहिए और इनसे बचने के तरीके बताए जाएं।
अमेरिका के कई राज्यों में मोबाइल पर लगा बैन?
अमेरिका के कई ऐसे भी राज्य हैं, जहां पर ना सिर्फ मोबाइल बैन करने को लेकर चर्चा हुई है, बल्कि ऐसा कर भी दिया गया है। नवंबर की शुरुआत तक, आठ राज्यों में क्लासरूम में मोबाइल इस्तेमाल पर बैन लगाने वाले कानून बन चुके हैं। कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा और वर्जीनिया जैसे राज्यों ने सबसे पहले ये काम किया है। मिनेसोटा जैसे दूसरे राज्य भी ऐसे ही कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं। इससे मालूम चलता है कि अमेरिका के कई सारे राज्यों में मोबाइल के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ रही है।
