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पहले ही सत्र में MVA सरकार का फैसला पलटेंगे फडणवीस, महाराष्ट्र में फिर पांच साल होगा मेयर-सरपंच का कार्यकाल!

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मुंबई

महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर लौटे देवेंद्र फडणवीस अब विधानमंडल के पहले सत्र में ही बड़ा मास्टरस्ट्रोक चलने जा रहे हैं। फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार ने मेयर और दूसरी नगर पालिकाओं के प्रमुखों के कार्यकाल को पांच साल करने की तैयारी की है। सरकार इसके लिए मौजूदा शीतलकालीन सत्र में ही संशोधन विधेयक पेश करेगी। महाराष्ट्र में मुंबई के बीएमसी चुनावों के साथ राज्य की 45 के करीब नगर निगमों/नगर पालिकाओं के चुनाव फरवरी में होने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार के इस कदम को बड़े मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है।

सदन में पेश होगा संशोधन विधेयक
सरकार की तरफ से इसके लिए महाराष्ट्र नगरपरिषदें, नगर पंचायतें व औद्योगिक नगरी (सुधारणा) विधेयक, 2024 (नगर विकास विभाग) (सन् 2024 महा. अध्या. क्र. 5 का रुपांतरित विधेयक) पेश किया जाएगा। इसके बाद अप्रत्यक्ष रूप से चयनित नगर पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का कार्यकाल पांच साल का हो सकेगा। महाराष्ट्र में सरपंच, ग्राम प्रधान, मुखिया या अध्यक्ष का चुनाव ग्राम सभा करती है। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। नगर पालिकाओं के महापौर का कार्यकाल वर्तमान में 2.5 साल का है। पहले यह वार्षिक हुआ करता था।

एमवीए ने किया था 2.5 कार्यकाल
महाराष्ट्र 1995 के बाद से कोई भी पार्टी कभी चुनाव नहीं जीत पाई है। हमेशा गठबंधन होता है। इसलिए हर गठबंधन अपने हिसाब से बदलाव करने की कोशिश करता है। पहले निगमों के लिए हर सीट पर एक उम्मीदवार होता था। जिसे 2002 में 2 पुरुषों और महिलाओं के पैनल में बदल दिया गया था। फिर 2007 में वापस एक उम्मीदवार पर आ गया। 2012 में उन्होंने 3 का पैनल बनाया। इसमें ओबीसी के लिए एक स्लॉट बनाया गया। 2017 में इसे 4 कर दिया। 2 पुरुष सामान्य और OBC। इसी तरह से 2 महिलाएं। सरपंच स्तर पर 2014 में बीजेपी ने सरपंच चुनाव को प्रत्यक्ष और 5 साल का कार्यकाल तय किया। एमवीए ने इसे वापस अप्रत्यक्ष चुनाव में बदल दिया था। नए बदलाव में कहा गया था कि निर्वाचित प्रतिनिधि 2.5 साल के कार्यकाल के साथ अपने बीच से सरपंच चुनेंगे।

फडणवीस पलटेंगे फैसला?
महाराष्ट्र विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के लिए जिस विधेयक को सूचीबद्ध किया गया है। उसमें कार्यकाल को पांच साल करने का प्रावधान है। इस देवेंद्र फडणवीस के नए दांव के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस जिनकी अगुवाई में बीजेपी ने 132 सीटें जीती हैं। पार्टी वर्तमान हालात का ज्यादा फयदा लेना चाहती। राजनीतिक विश्लेषक दयानंद नेने कहते हैं कि सभी पार्टियों नगर निकायों में पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती आई हैं। देवेंद्र फडणवीस जो मजबूत बहुमत से लौटे हैं। वे भी पक्ष में बह रही वर्तमान हवा का लाभ उठाने और महाराष्ट्र में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए है।

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