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निशिकांत दुबे-मनोज तिवारी को राहत? SC ने झारखंड सरकार से पूछा- एयरक्राफ्ट एक्ट में CID कैसे जांच कर सकती है

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नई दिल्ली/रांची

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को झारखंड सरकार से सवाल किया कि सीआईडी बीजेपी के सांसदों निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ विमानन नियमों के उल्लंघन के मामले की जांच क्यों कर रही है? जबकि आरोपों की जांच की जिम्मेदारी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की थी। दोनों सांसदों पर देवघर एयरपोर्ट से अपने चार्टर्ड विमान को उड़ान भरने की मंजूरी देने के लिए हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) पर दबाव डालने का आरोप है।
अदालत ने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील जयंत मोहन से कहा कि यह मामला वायुयान अधिनियम (एयरक्राफ्ट एक्ट) के तहत विचारणीय है, जिसमें विमानन अपराधों से संबंधित मामलों की जांच के लिये एकमात्र जिम्मेदारी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को दी गई है।

निशिकांत दुबे, मनोज तिवारी सहित नौ लोगों पर हुई थी FIR
अगस्त 2023 में देवघर जिले के कुंडा पुलिस थाने में दोनों सांसदों निशिकांत दुबे, मनोज तिवारी सहित नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों पर कथित तौर पर एटीसी कर्मियों को 31 अगस्त, 2022 को निर्धारित समय से परे देवघर एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लिए अपनी चार्टर्ड उड़ान को मंजूरी देने के लिए मजबूर करने का आरोप है।

न्यायमूर्ति ए.एस. ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने पूछा सवाल
न्यायमूर्ति ए.एस. ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने पूछा, ‘मामला वायुयान अधिनियम के तहत विचारणीय है तो झारखंड अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) कैसे जांच कर सकती है।’ पीठ ने झारखंड हाई कोर्ट के 13 मार्च 2023 के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर भी अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें भाजपा सांसदों और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी रद्द कर दी गई थी।

हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी प्राथमिकी
हाई कोर्ट ने इस आधार पर प्राथमिकी रद्द कर दी थी कि वायुयान (संशोधन) अधिनियम, 2020 के अनुसार लोकसभा सचिवालय से कोई पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी। कानून के तहत किसी सांसद के खिलाफ किसी भी प्राथमिकी को सचिवालय की ओर से अनुमोदित किया जाना चाहिए।

फैसला सुरक्षित रखने से पहले अदालत ने राज्य सरकार की ओर से वकील जयंत मोहन और भाजपा नेताओं की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह की दलीलें सुनीं। न्यायालय ने राज्य से अपने इस तर्क के समर्थन में निर्णय प्रस्तुत करने को कहा कि पूर्व अनुमति के बिना भी जांच जारी रह सकती है।

निशिकांत दुबे के वकील ने कोर्ट को बताया कि 31 अगस्त को देवघर से दिल्ली जाने वाली उड़ान में देरी हुई थी। हालांकि, विमानन नियमों के मुताबिक विमान सूर्यास्त के आधे घंटे बाद भी उड़ान भर सकता है। उन्होंने कहा कि उस दिन सूर्य लगभग 6.03 बजे अस्त हुआ, जबकि विमान ने 6.17 बजे उड़ान भरी – जो उड़ान के स्वीकृत मानदंडों के अनुरूप था। उन्होंने तर्क दिया कि सांसदों को राजनीतिक प्रतिशोध के कारण निशाना बनाया गया तथा दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठे मामले में फंसाया गया।

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