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कुवैत में इस्लाम से पहले क्या था? खुदाई में मिली 7000 साल पुरानी मूर्ति देख एक्सपर्ट हैरान, मुस्लिम देश के इतिहास पर होगा नया खुलासा!

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कुवैत सिटी

कुवैत में पुरातत्वविदों को एक 7,000 साल पुरानी मिट्टी की मूर्ति मिली है। यह मूर्ति किसी एलियन जैसी दिखाई देती है। इस मूर्ति की बनावट मेसोपोटामिया की प्राचीन कला शैली से मिलती है। यह कुवैत और अरब की खाड़ी में मिली इस तरह की पहली मूर्ति है। यह खोज उत्तरी कुवैत के बहरा-1 नाम की जगह पर हुई है, इस जगह पर कभी प्राचीन बस्ती हुआ करती थी। इस खोज से कुवैत और आसपास के देशों की संस्कृति को भी दिखाती है। इससे ये पता चलता है कि मुस्लिम बाहुल्य कुवैत में इस्लाम के आने से पहले किस तरह की धार्मिक आस्थाएं थीं।

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत में मिली यह मूर्ति उबैद संस्कृति से जुड़ी है, जो मेसोपोटामिया से आई थी। उबैद लोग छठी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में अरब की खाड़ी में नवपाषाण समाजों के साथ घुलमिल गए थे। इस वजह से यह क्षेत्र सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बन गया था। इस मूर्ति के मिलने पर एक्सपर्ट आश्चर्य जता रहे हैं।

क्या इशारा करती है ये मूर्ति
एक्सपर्ट का कहना है कि यह मूर्ति मेसोपोटामियाई मिट्टी से बनी है, ना कि अरब की खाड़ी की स्थानीय मिट्टी से बनी है। इससे पता चलता है कि उबैद लोग अपनी परंपराओं को इस क्षेत्र में लाए थे। इस मूर्ति में बारीकी से बनाया गया सिर, तिरछी आंखें, चपटी नाक और लंबी खोपड़ी है। ये मूर्ति बहरा 1 से मिली है, ये उत्तरी कुवैत में एक प्रागैतिहासिक स्थल है। यहां 2009 से एक कुवैती-पोलिश टीम खुदाई कर रही है।

बहरा 1 अरब प्रायद्वीप की सबसे पुरानी बस्तियों में से एक थी। यहां लोग तकरीबन 5500 से 4900 ईसा पूर्व तक रहे। उस समय बहरा-1 में उबैद लोग रहते थे। यह एक संस्कृति थी जो मेसोपोटामिया में शुरू हुई और अपने विशिष्ट मिट्टी के बर्तनों के लिए जानी जाती है। इसमें एलियन जैसी मूर्तियां भी शामिल हैं। वॉरसॉ विश्वविद्यालय के पोलिश सेंटर ऑफ मेडिटेरेनियन आर्कियोलॉजी की पुरातत्वविद् सिमजक ने कहा है कि ये पहली बार है जब इस तरह की मूर्ति मिली है।

बेल्जियम में गेन्ट विश्वविद्यालय के एक पुरातत्वविद् ऑरेली डेम्स का मानना है कि ये मूर्ति उस वक्त के लोगों के धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक प्रथाओं के बारे में जानकारी देगी। साथ ही प्रागैतिहासिक खाड़ी क्षेत्र और मेसोपोटामिया के बीच संबंधों को भी सामने लाएगी। ये मूर्ति दिखाती है कि पांचवीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व के दौरान उबैद समाज में किस तरह का चलन था। मिट्टी की मूर्ति के सिर पर विशेषज्ञों का अध्ययन जारी है।

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