इस्लामाबाद
अमेरिका ने एक अहम फैसले में पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में शामिल चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इस पर कहा कि उनकी पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम पर कई चिंताएं हैं। अमेरिका के इस फैसले पर पाकिस्तान के राजनीतिक टिप्पणीकार कमर चीमा ने प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका के फैसले पर गुस्सा जताते हुए चीमा ने कहा है कि पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम पर बैन एक भेदभावपूर्ण फैसला है। ऐसे की कार्यक्रम भारत में भी चल रहे हैं लेकिन इस पर अमेरिका ने आंख बंद कर रखी हैं।
कमर चीमा ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, ‘भारत 7000 किमी रेंज की मिसाइल बना रहा है लेकिन पाकिस्तान की 2800 किमी की रेंज की बेलिस्टिक मिसाइलों को रोका जा रहा है। पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका को बैन लगाना याद है जबकि ये कम खतरनाक है। वहीं भारत की मिसाइलें यूरोप तक भी पहुंचे तो कोई बात नहीं है। अमेरिका का ये रुख समझ से परे है। ये हमारी नाकामयाबी भी दिखाता है कि पाकिस्तान ना तो अमेरिका से ठीक से बात कर पा रहे है और ना अपना पक्ष रपख पा रहा है।’
अमेरिका के फैसले के पीछे क्या मकसद?
कमर चीमा ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका पर तो कभी हमला नहीं करेगा बल्कि दोनों के रिश्ते बहुत करीबी रहे हैं। अमेरिका से ही पाकिस्तान को सैन्य मदद मिलती रही है। पाकिस्तान की बात की जाए तो वह आमतौर पर भारत से ही खतरा बताता है। भारत हालांकि पाकिस्तान के अलावा चाीन से भी खतरा मानता है लेकिन पाकिस्तान तो भारत से ही मुश्किल मानता है। ऐसे में सवाल है कि अमेरिका ने क्यों पाकिस्तान पर ये सख्ती दिखाई है।
अमेरिका के फैसले के पीछे की वजह खोजते हुए चीमा ने कहा, ‘मौजूदा हालात में जो हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि ये पश्चिम एशिया की वजह से है। अमेरिका को ऐसा लग सकता है कि पाकिस्तान की इन मिसाइलों की जद में इजरायल आ सकता है। पाकिस्तान में एक बड़ा वर्ग है, जो इजरायल के खिलाफ है। इजरायल के लिए कोई मुश्किल पाकिस्तान के लिए ही मुश्किल है। हमास और हिजबुल्लाह के लिए भी पाकिस्तान के एक वर्ग में सहानुभूति है। ऐसे में हो सकता है कि इसी तरह से अमेरिका ने इस प्रोग्राम को देखा हो।’
‘चीन से दूरी बनाने का इशारा’
कमर चीमा ने आगे कहा, ‘अमेरिका कई काम इशारे में भी करता है। ये पाकिस्तान के लिए एक इशारा भी हो सकता है कि चीन के पास ज्यादा ना जाएं। अमेरिका इस बात से नाराज हो सकता है कि पाकिस्तान उसका पुराना साथी है लेकिन अब वो चीन के पास जा रहा है। ये हो सकता है कि अमेरिका ने हमे ये संदेश देने की कोशिश की हो कि आप अगर हमारी नहीं सुनते हैं तो कल ये प्रतिबंध बढ़ भी सकते हैं। अमेरिका में वैसे भी अब डोनाल्ड ट्रंप आ रहे हैं, वो भारत से कनाडा तक सबको टैक्स बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं। यही वो पाकिस्तान के साथ भी दबाव बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
