24.6 C
London
Thursday, June 18, 2026
Homeराजनीतिबेलगांव से अंबेडकर के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी, कांग्रेस ने...

बेलगांव से अंबेडकर के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरने का बनाया अचूक प्लान

Published on

नई दिल्ली

संसद का शीतकालीन सत्र खत्म हो गया। संविधान के 75 साल पूरे होने के मौके पर संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को लेकर विवाद को लेकर जो सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है, उसके थमने के आसार नजर नहीं आ रहे। अंबेडकर के कथित अपमान को लेकर कांग्रेस व इंडिया गठबंधन के उसके सहयोगी ने जो विरोध का संघर्ष संसद सत्र के दौरान शुरू किया था, उसे कांग्रेस ने नई धार देने की योजना बनाई है।

कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की बनाई योजना
इसके तहत कांग्रेस ने कर्नाटक के बेलगांव में होने वाली अपनी सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) विस्तारित बैठक से अंबेडकर के अपमान के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष और विरोध के शंखनाद की योजना बनाई है। कांग्रेस महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक आयोजन कर रहा है। दरअसल, 1924 में गांधी कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे और कांग्रेस का वह अधिवेशन बेलगांव में ही हुआ था।

विशाल रैली का भी होगा आयोजन
कांग्रेस के इतिहास में गांधी सिर्फ एक बार अध्यक्ष रहे। इसलिए पार्टी ने गांधी से जुड़े उस ऐतिहासिक मौके को विशेष रूप से मनाने की तैयारी की है। सीडब्ल्यूसी की यह विस्तारित बैठक आगामी 26-27 दिसंबर को बेलगांव में होने जा रही है। जहां 26 को सीडब्ल्यूसी की बैठक होगी, वहीं 27 साल को एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर हाल ही में कांग्रेस के टॉप लीडरशिप कर्नाटक में व्यवस्था व तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे।

बेलगांव पर कांग्रेस का फोकस क्यों?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक मौके को गांधी के साथ-साथ आंबेडकर और संविधान के साथ-साथ जोड़ने की योजना बनाई है। बदले हुए घटनाक्रम में अब कांग्रेस गांधी के कांग्रेस अध्यक्षता के 100वी वर्षगांठ के मौके पर बेलगांव से बाबासाहेब के अपमान के खिलाफ अपने देशव्यापी जमीनी संघर्ष व विरोध का शंखनाद करने जा रही है। कांग्रेस के एक सीनियर नेता का कहना था कि हम बेलगांव में सीडब्ल्यूसी का आयोजन करने की पहले से तैयारी कर रहे थे, जहां लोकतंत्र, संविधान जैसे मुद्दे पहले ही हमारे अजेंडे में थे, लेकिन हालिया घटनाक्रम में इसे नई धार दे दी।

तीन स्तर पर होगा जमीनी संघर्ष
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस जमीनी संघर्ष को देशभर में तीन स्तर पर चलाएगी। इसे लेकर कांग्रेस के भीतर रूपरेखा तैयार की जा रही है। कांग्रेस इसके जरिए दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों व अल्पंख्यकों को लक्षित कर अपनी योजना को आगे बढ़ाएगी। आंबेडकर व संविधान से जोड़ते हुए केंद्र सरकार, बीजेपी व संघ की नीतियों के खिलाफ जातिगत जनगणना, एक देश-एक चुनाव व यूसीसी जैसे मुद्दों को लेकर जमीन पर समाज के पिछड़े, वंचित लोगों के बीच जाने की तैयारी भी है।

अंबेडकर और गांधी की विरासत से जुड़ने की कोशिश
गौरतलब है कि जिस तरह से बीजेपी की ओर अंबेडकर और गांधी जैसे बड़े नेताओं की विरासत से खुद को जोड़ने और कांग्रेस पर उनकी अनदेखी व अपमान के आरोप लगाने की कोशिश हो रही है, उसके मद्देनजर कांग्रेस का मानना है कि गांधी व अंबेडकर जैसे नेताओं के विचारों को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ाया जाए, ताकि वह अपने खिलाफ बीजेपी के दुष्प्रचार का जवाब दे सके।

इसलिए अब कांग्रेस ने गांधी की कांग्रेस अध्यक्षता के 100 साल के मौके को अंबेडकर के अपमान के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकने मौका बनाने की तैयारी की है। कांग्रेस ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर वह रुकने वाली नहीं है और न ही इसे छोड़ने वाली है। जिस तरह से अंबेडकर के मुद्दे को लेकर कांग्रेस की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उससे कांग्रेस के इरादे व तैयारियां समझ आती हैं।

अंबेडकर के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की तैयारी
कांग्रेस के एक सीनियर रणनीतिकार का कहना था कि बीजेपी व संघ का सिस्टम चाहे हम पर कितने भी हमले कर ले, चाहे हमारे खिलाफ कितनी भी रिपोर्ट लिखा ले, लेकिन बाबासाहेब के अपमान के ख्रिलाफ और संविधान को लेकर हमारी लड़ाई रुकने वाली नहीं है। दरअसल, रणनीतिकार का इशारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हुई एफआईआर व कांग्रेस अंबेडकर मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान यूपी व असम में अपने वर्कर्स की मौत व महाराष्ट्र में अपने ऑफिस में हुई तोड़-फोड़ की ओर था।

कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
वहीं कांग्रेस नेता व राज्यसभा में सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया में कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी जी ने संसद की सीढ़ियों पर मत्था टेका था, फिर ये हुआ की संसद ही बदल दी। इस बार संविधान को मत्था टेका है, इसलिए ज्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है। हालांकि शुरू में कांग्रेस इस विरोध व संघर्ष को पार्टी स्तर पर चलाएगी, लेकिन आने वाले वक्त में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ मिलकर भी अपने विरोध को अगले चरण में ले जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीडब्ल्यूसी के बाद इस दिशा में कोई बात हो सकती है। दरअसल, अगले साल देश में दिल्ली व बिहार जैसे राज्य में चुनाव होने हैं, भले ही यहां कांग्रेस का ज्यादा स्टेक न हो, लेकिन संविधान व बाबासाहेब के बहाने वह बीजेपी व संघ की नीतियों को कटघरे में खड़े करने की रणनीति पर काम कर रही है। बाबा साहेब के बहाने विपक्ष एक बड़ी आबादी को गोलबंद कर सकता है।

Latest articles

मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर जारी, 28 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, जून में 35% कम वर्षा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी...

रणथंभौर एक्सप्रेस के कोच से निकला धुआं, यात्रियों में मची अफरातफरी; 20 मिनट तक खड़ी रही ट्रेन

रतलाम। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर रतलाम जिले में कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले...

मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: छह आईएएस अधिकारियों के तबादले, कई अफसरों को मिली नई जिम्मेदारी

भोपाल। मप्र शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक...

More like this

भेल में अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियों का उद्घाटन— ईडी ने किया शुभारंभ

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल के कार्यपालक निदेशक (ईडी) पीके उपाध्याय ने...

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...