15 C
London
Tuesday, June 16, 2026
Homeराजनीतिवित्त मंत्री मनमोहन सिंह जब इस्तीफा देने पर हो गए थे उतारू,...

वित्त मंत्री मनमोहन सिंह जब इस्तीफा देने पर हो गए थे उतारू, दिल पर लग गई थी वाजपेयी की ये बात

Published on

नई दिल्ली

देश के पूर्व प्रधामंत्री मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार का मुखिया होने से पहले मनमोहन सिंह वित्त मंत्री के रूप में राजनैतिक गलियारे में अपनी मजबूत प्रतिष्ठा बना चुके थे। साल 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने आर्थिक संकट से घिरे देश को बचाने के लिए मनमोहन सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी। राजनीति से बाहर से आए मनमोहन सिंह के लिए ये राह आसान नहीं थी।

जिस समय नरसिम्हा राव की सरकार बनी, उस समय देश पर विदेशी मुद्रा का गंभीर संकट था। ऐसे में नए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे सलाह मांगी कि ऐसे माहौल में वित्त मंत्री किसे बनाया जाए। अपनी किताब ‘जब मैं राष्ट्रपति था’ में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन ने लिखा है कि नरसिम्हा राव ने मुझसे कहा कि वह ऐसे व्यक्ति को वित्त मंत्री बनाना चाहते हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की जानकारी और उसके साथ काम करने का थोड़ा अनुभव भी हो।

वेंकटरमन ने आगे लिखा, इस पर मैंने नरसिम्हा राव को सुझाव दिया कि ऐसे में उन्हें ऐसे व्यक्ति को वित्तमंत्री बनाना चाहिए जो पार्टी के बाहर का हो। मैंने उन्हें दो नामों का सुझाव दिया। वेंकटरमन ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री (राव) ने इसके बाद मनमोहन सिंह को वित्तमंत्री के रूप में चुना। वे साउथ ब्लॉक में उनके उत्कृष्ट कामों से परिचित थे।

वित्तमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधारों को लेकर फैसले लेना शुरू कर दिया। साल 1992 में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने अपना पहला बजट पेश किया। इस दौरान विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके बजट की जमकर आलोचना की। उनकी आलोचना से मनमोहन सिंह का गैर राजनीतिक कोमल मन ऐसा व्यथित हुआ कि उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया। नरसिम्हा राव को जब ये बात पता चली तो वह परेशान हो गए।

बाद में राव ने वाजपेयी से आग्रह किया कि वे मनमोहन सिंह से बात करें। इसके बाद वाजपेयी ने मनमोहन सिंह से मुलाकात की और उनसे कहा कि विपक्ष की आलोचना को वह निजी तौर पर न लें। विपक्ष का काम तो आलोचना करना ही है। यह सुनने के बाद मनमोहन सिंह ने अपना फैसला बदला। हालांकि, इसके बाद वे राजनीति में बेहद गंभीर हो गए। दो बार के अपने प्रधानमंत्रित्व काल उन पर विपक्ष के तमाम हमले हुए लेकिन मनमोहन सिंह किसी भी आलोचना से विचलित नहीं हुए।

Latest articles

जनसेवा ही प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च उद्देश्य, संवेदनशीलता और निष्पक्षता से करें कार्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास...

राजस्थान में कंगना रनौत की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ टैक्स फ्री घोषित

जयपुर। राजस्थान सरकार ने बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत अभिनीत हालिया रिलीज फिल्म...

अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को पंथ विरोधी करार दिया, आप ने फैसले पर उठाए सवाल

चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया...

व्यापमं घोटाले के 847 आरोपियों के खिलाफ एक ही गवाह, सुरक्षा भी नहीं

भोपाल। मप्र के सबसे चर्चित और देश के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...