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बिहार CM पे भरोसा काहे नइखे? 2024 में नीतीश कुमार ने पाला बदला, 2025 में भी बरकरार है खतरा!

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पटना

नीतीश कुमार बार-बार सफाई दे रहे हैं। कह रहे- अब पिछली गलती नहीं करेंगे। एनडीए में ही रहेंगे। उनकी इस सफाई के बावजूद न भाजपा उनके साथ बने रहने को लेकर आश्वस्त है और विपक्षी गठबंधन इंडिया ही हतोत्साहित है। इंडिया ब्लाक को अब भी उम्मीद है कि नीतीश फिर पाला जरूर बदलेंगे। इंडिया ब्लाक का ऑफर शायद अब भी बरकरार है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहते केसी त्यागी ने कहा था कि इंडिया ब्लाक ने नीतीश कुमार को पीएम पद का ऑफर दिया था।

जनवरी 2024 में नीतीश ने पाला बदला
जनवरी 2024 की उस वर्चुअल बैठक के बाद ही नीतीश कुमार ने इंडिया ब्लाक छोड़ने का फैसला किया, जिसमें राहुल गांधी ने बताया कि कांग्रेस उन्हें संयोजक बनाने को तैयार हैं, लेकिन ममता बनर्जी नहीं चाहतीं। इस पर नीतीश का नाराज होना स्वाभाविक था। सहमति बना कर ही उन्होंने ममता बनर्जी को सबके साथ बैठने को राजी किया था। उनमें कांग्रेस भी थी, जिससे ममता बनर्जी आज भी चिढ़ती हैं। चिढ़ ऐसी कि बंगाल में कांग्रेस को नेस्तनाबूद कर दिया और अब राहुल गांधी की लीडरशिप को चुनौती दे रही हैं। चुनौती भी गजब की। पहले गोलबंदी की और बाद में कमान संभालने की रजामंदी का ऐलान भी कर दिया।

सीएम नीतीश पूरे साल सफाई देते रहे
28 जनवरी 2024 को नीतीश ने इंडिया ब्लाक का साथ छोड़ कर एनडीए में जाने का फैसला किया था। चट मंगनी, पट ब्याह के तर्ज पर उन्होंने महागठबंधन सरकार गिरा दी और भाजपा के सहयोग से सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। सरकार बनी और नीतीश कुमार ने संकल्प दोहराया कि अब कभी आरजेडी के साथ नहीं जाएंगे। उन्होंने यह सफाई साफ मन से दी या इसमें सियासत की कोई संभावना बचा कर रखी, यह तो वे ही जानें, पर उनकी सफाई पूरे साल समय-समय पर आती रही। कभी पीएम नरेंद्र मोदी के सामने उन्होंने एनडीए से कभी अलग न होने की बात कही तो एक बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने भी अपना संकल्प दोहराया।

2025 में भी लग रही वैसी ही अटकलें
सब ठीक चल रहा था। ऊपर-ऊपर आज भी ठीक है। पर नीतीश को लेकर फिर तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं। तर्क यह दिया जा रहा है कि नीतीश कुमार भाजपा नेतृत्व से नाराज हैं। हालांकि नीतीश कुमार ने कभी अपनी जुबान से नाराजगी की बात नहीं कही, लेकिन उनके इशारे नाराजगी की आशंका को जन्म दे रहे हैं। अमित शाह ने बिहार में अगले सीएम के बाबत जब से यह कहा है कि मुख्यमंत्री का फैसला संसदीय बोर्ड करेगा, तभी से नीतीश की नाराजगी की खबरें आने लगी हैं। इसमें तड़का तब लग गया, जब पटना में हुए निवेशकों के सम्मेलन बिहार कनेक्ट से नीतीश ने दूरी बना ली। अस्वस्थता के नाम पर वे इस महत्वपूर्ण कार्यकक्रम नहीं गए. लेकिन उन्होंने निश्चित समय पर अपनी प्रगति यात्रा शुरू कर दी, इससे लोगों को शंका हुई कि वे नाराज हैं। मीडिया में चल रही ऐसी खबरों पर नीतीश कुमार की चुप्पी ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

नीतीश के लिए कांग्रेस बेचैन
नीतीश कुमार ने इस बीच स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली का एक दिन का टूर प्लान कर लिया। वे रविवार को दिल्ली गए। कहा गया कि वे रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए गए हैं। पर, उनके कार्यक्रम में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पिरजनों से मुलाकात भी शामिल थी। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं बिहार में शुरू हो गईं। कहा गया कि नीतीश भाजपा से नाराज हैं और फिर इंडिया ब्लाक में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। इसी क्रम में उनके कांग्रेस नेताओं से मिलने की भी चर्चा थी। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। कहने वाले तो यह भी कह रहे थे कि वे भाजपा नेताओं से मिल कर अमित शाह के बयान पर आपत्ति जता सकते हैं।

राजनीति में अविश्वसनीय बने नीतीश
राजनीति में दल बदल या खेमा बदल कोई नई बात नहीं है। लेकिन नीतीश कुमार की खेमा बदल की फ्रिक्वेंसी ऐसी रही है कि वे अब राजनीति का सबसे अविश्वसनीय चेहरा बन गए हैं। पहली बार 2015 में आरजेडी के साथ गए। दो साल बाद 2017 में भाजपा के साथ आ गए। 2022 में फिर आरजेडी के साथ गए और जनवरी 2024 में एनडीए में वापसी की। इधर-उधर की उनकी आवाजाही देख कर ही लोगों ने पलटू बाबू और पलटू कुमार जैसे संबोधन से उन्हें नवाजना शुरू कर दिया है। भाजपा के साथ सरकार चलाते रहने के बावजूद पूरे साल उनके एनडीए में बने रहने पर अनिश्चितता के बादल मंडराते रहे। उनकी सफाई को भी लोग उनकी चाल समझ कर संदेह की नजरों से देखते रहे हैं।

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