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Tuesday, May 5, 2026
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राजस्थान में अडाणी की कम्पनी को बड़ा झटका, गहलोत राज में दी जमीन सरकार ने वापस ली

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जैसलमेर

राजस्थान में अडाणी कम्पनी को वर्ष 2022 में गहलोत सरकार ने सोलर प्लांट लगाने के लिए 3300 बीघा जमीन अलॉट की थी। प्रदेश में भजनलाल सरकार बनने के बाद ओरण बचाने इस जमीन के लिए ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया। 62 दिन तक चले इस आंदोलन के बाद अब भजनलाल सरकार ने अडाणी से 812 बीघा जमीन वापस ले ली है। इसी के साथ जैसलमेर के बईया गांव में ओरण बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीणों का धरना सोमवार को समाप्त हो गया है।

गहलोत राज में अडाणी की कंपनी को 3300 बीघा जमीन दी गई
गहलोत सरकार के समय 2022 में जैसलमेर के फतेहगढ़ तहसील के बईया, मगरा, भू की ढाणी क्षेत्र की करीब 3300 बीघा जमीन अड़ानी ग्रीन एनर्जी को दी गई थी। इसमें 229 एकड़ जमीन निजी खातेदारी की जमीन थी। इसमें 9.62 एकड़ जमीन पर सब स्टेशन का निर्माण होना है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा प्रोजेक्ट मैसर्स अड़ानी सोलर एनर्जी बाड़मेर वन प्राइवेट लिमिटेड का है। 812 बीघा सरकारी जमीन को जहां कंपनी ने छोड़ दिया है। वहीं सरकार ने अब कंपनी को 812 बीघा दूसरी जगह जमीन अलॉट करने की बात कही है।

ऐसे शुरू हुआ आंदोलन, ओरण के लिए धरने पर बैठे लोग
अडानी ग्रीन एनर्जी के प्रोजेक्ट को पूरा करने की उम्मीद में 5 नवंबर को कंपनी के कार्मिक बईया गांव पहुंचते थे। वहां निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन यहां मामला उलटा पड़ गया। ग्रामीण कंपनी के कार्मिकों से अड़ गए। ग्रामीण कहते हैं कि यह क्षेत्र रोहिड़ाला ओरण का है जो हमारी धार्मिक आस्था का विषय है। इस जमीन को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी। ये ओरण क्षेत्र वन्य जीवों के विचरण के लिए हैं। यहां हम किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। ऐसे में पुलिस ने भी ग्रामीणों पर दबाव बनाया जाता है, जिसे देखकर ग्रामीण शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी को धरना स्थल पर बुलाया और धरने ने नया रूप ले लिया।

विधायक धरने पर बैठे, वार्ताओं का दौर चला
रविंद्र सिंह भाटी ग्रामीणों के समर्थन में उतरते हैं और यह मुद्दा बढ़ता गया। इस बीच कम्पनी के कार्मिक भी धरना स्थल पर पहुंचे। जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी, जैसलमेर के पूर्व विधायक रुपाराम धनदेव, पोकरण विधायक महन्त प्रतापपुरी सहित कई जनप्रतिधि धरना स्थल पर पहुंच गए। वार्ताओं का दौर चलता रहा, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।

62 दिन बाद धरना खत्म हुआ
आखिरकार राज्य सरकार के निर्देशन में जैसलमेर अतिरिक्त जिला कलेक्टर पवन कुमार के लिखित आश्वासन के बाद 62 दिन से जारी धरना 6 जनवरी 2025 को समाप्त हुआ। प्रशासन ने निजी कंपनी को 812 बीघा जमीन दूसरी जगह अलॉट करने और मुंह बोली ओरण की जमीन को ओरण के रूप मे रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए प्रयास करने का लिखित आश्वासन दिया।

गौरतलब है कि सरकार ने कंपनी को 128 खसरे एलाट किए थे। लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद कम्पनी ने 128 खसरों में से 12 खसरे (812 बीघा) जहां वापस लौटा दिए हैं। इसके रूप में कम्पनी को दूसरी जगह जमीन दी जाएगी। वहीं अब 116 खोसरो पर कंपनी काम शुरू कर रही है। आपको बता दे कि जैसलमेर जिले का यह पहला मामला है जहां किसी कंपनी ने अलॉट जमीन को सरेंडर किया है।

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