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ट्रंप का खौफ! इमिग्रेंट खुद ही छोड़ रहे अमेरिका, सेल्फ डिपोर्टेशन का चौंकाने वाला मामला जानें

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वॉशिंगटन

अमेरिका में संभावित ‘मास डिपोर्टेशन’ से पहले कुछ आप्रवासी ‘सेल्फ डिपोर्टेशन’ अपना रहे हैं। 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने जा रहे रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों को देश से निर्वासित करने का वादा किया है। ट्रंप के आने से पहले ही एक महिला ने अमेरिका छोड़ दिया है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, निकारागुआ के छात्र विद्रोह की पूर्व नेता 31 वर्षीय मिशेल बेरियोस अमेरिका में वैध रूप से रह रही थीं लेकिन नए साल से कुछ दिन पहले उन्होंने अमेरिका छोड़ दिया। उनका मामला सेल्फ डिपोर्टेशन से जोड़कर बताया जा रहा है। सेल्फ डिपोर्टेशन का मतलब स्वयं ही देश से बाहर हो जाने से है।

एपी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”मिशेल बेरियोस ने नए साल से कुछ दिन पहले अमेरिका छोड़ दिया, जिससे नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामूहिक निर्वासन अभियान को शुरू होने से पहले ही एक छोटी सी जीत मिल गई।” रिपोर्ट के मुताबिक, बेरियोस अमेरिका ऐसे समय छोड़ दिया जब यूएस में उन्हें प्राप्त मानवीय पैरोल का समय शेष था। राष्ट्रपति जो बाइडेन की ओर से कुछ कमजोर देशों के नागरिकों के लिए मानवीय पैरोल प्राधिकरण का इस्तेमाल किया गया है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान की गई कठोर बातों ने बेरियोस के मन में अपने देश में अधिकारियों से छिपने की चिंताजनक यादें ताजा कर दी थीं। ऐसे प्रस्थानों को जिन वकीलों और आव्रजन विशेषज्ञों ने देखा है, उनका कहना है कि कानूनी स्थिति के बावजूद बेरियोस का अमेरिका छोड़ने का निर्णय यह दर्शाता है कि सोमवार को ट्रंप के पदभार ग्रहण करने से पहले अनिश्चितता और खतरों के कारण बड़ी संख्या में लोग अमेरिका छोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रस्थानों पर डेटा उपलब्ध नहीं है लेकिन इतिहास में ऐसे मामले देखे गए हैं, जब कानूनी स्थिति वाले या बिना कानूनी स्थिति वाले प्रवासियों को बाहर जाना पड़ा।

अमेरिका के बारे में बेरियोस छलका दर्द
31 वर्षीय बेरियोस ने अपने प्रस्थान से कुछ दिन पहले कहा था, ”चूंकि (अमेरिका) तीसरी दुनिया का देश नहीं है, जैसा कि हममें से कई लोग जहां से आते हैं, मैंने सोचा था कि यहां एक अलग संस्कृति होगी और यह अचानक और अप्रिय बात थी कि आपका और आपके परिवार का स्वागत नहीं है।” निकारागुआ में उनका जीवन परेशानी में था।

सेल्फ डिपोर्टेशनबॉर्डर जार का क्या कहना है?
ट्रंप की ओर से चुने गए बॉर्डर जार (अमेरिकी सीमाओं के प्रभारी) टॉम होमन ने कहा है, ”अगर आप सेल्फ डिपोर्टेशन करना चाहते हैं तो आपको ऐसा करना चाहिए, क्योंकि हम जानते हैं कि आप कौन हैं हम आकर आपको ढूंढ लेंगे।” बेरियोस सैन फ्रांसिस्को के पूर्व में कैलिफोर्निया में अपने कजिन के साथ कानूनी रूप से रह रही थीं। वह ट्रंप समर्थकों के साथ एक ऑटो रिपेयर शॉप के फ्रंट डेस्क पर काम कर रही थीं। ट्रंप के चुने जाने के बाद उनके सहकर्मियों की ओर से आप्रवासी विरोधी टिप्पणियां बढ़ गईं और उनकी बेचैनी बढ़ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला शरणार्थी आयोग में वकालत और बाहरी संबंधों की उपाध्यक्ष मेलानी नेजर ने कहा कि स्थायी कानूनी स्थिति के बिना किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसा डर स्वाभाविक है। बेरियोस की तरह रहने और काम करने की अस्थायी अनुमति वाले लोगों को जल्द ही यह स्थिति समाप्त होती दिख सकती है। लगभग एक मिलियन (10 लाख) लोगों को अस्थायी संरक्षित दर्जा प्राप्त है और बेरियोस जैसे लगभग 500,000 लोगों को मानवीय पैरोल दी गई है, जो चार देशों- क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के शरण चाहने वाले लोग हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह दोनों को हटाना चाहते हैं।

निकारागुआ से क्यों अमेरिका आई थीं बेरियोस?
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 तक बेरियोस निकारागुआ में काफी सामान्य जीवन जी रही थीं, वह मनागुआ में एक कॉल सेंटर में काम कर रही थीं। फिर निकारागुआ की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में बदलाव ने सेवानिवृत्त लोगों को विरोध करने के लिए प्रेरित किया। पुलिस और ओर्टेगा समर्थकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया तो छात्र उनकी सहायता के लिए आगे आए। इसके बाद घातक झड़पें हुईं। बेरियोस भी प्रदर्शनकारी छात्रों में शामिल थी और एक प्रोटेस्ट लीडर बन गईं।

सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को कैद किया गया, कई को प्रताड़ित किया गया और हाल ही में देश से निकाल दिया गया और उनकी नागरिकता छीन ली गई। बेरियोस निकारागुआ के अधिकारियों की ओर से प्रताड़ित होने की आशंका के चलते अमेरिका आ गईं। उन्होंने कहा, ”इसलिए मैंने फैसला किया, शायद अमेरिका मेरी मानसिक शांति के लिए बदलाव करने में मेरी मदद कर सकता है।”

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