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Friday, June 5, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड बंद किया तो राजनीतिक चंदे का क्या हुआ? जान लीजिए पूरी बात

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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगा दी। तो क्या राजनीतिक दलों को चंदे आने बंद हो गए या मिले तो फिर कैसे? जवाब है- बंद तो नहीं हुए, बस रास्ता बदल गया। अब चुनावी न्यासों के जरिए चंदे दिए जा रहे हैं। न्यूज वेबसाइट ने निर्वाचन आयोग (ECI) की रिपोर्ट के हवाले से खबर दी है कि इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगने के बाद राजनीतिक दलों को चंदा पहुंचाने का काम इलेक्टोरल ट्रस्ट की तरफ शिफ्ट हो गया। सर्वोच्च न्यायलय ने 15 फरवरी, 2024 को चुनावी बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक बताकर बैंकों को तुरंत बॉन्ड जारी करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

चुनाव आयोग की रिपोर्ट में सबका खुलासा
चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा चंदा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को मिला है। इस ट्रस्ट को मिले कुल चंदे का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा सुप्रीम कोर्ट के 15 फरवरी के फैसले के बाद प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट को कुल 1,075.7 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जिसमें से 797.1 करोड़ रुपये कोर्ट के फैसले के बाद मिले। रिपोर्ट के अनुसार, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को मिला चंदा पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना बढ़ गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह 1075.7 करोड़ रुपये था, जबकि उससे पिछले साल यह 363.16 करोड़ रुपये था।

ट्रस्ट के जरिए मिलने लगे चंदे
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में इस ट्रस्ट को सबसे ज्यादा चंदा देने वालों की लिस्ट में 100 करोड़ रुपये के साथ आर्सेलर मित्तल निप्पॉन शीर्ष पर है। उसके बाद 99.5 करोड़ के साथ डीएलएफ दूसरे, 75 करोड़ रुपये के साथ माथा प्रॉजेक्ट्स तीसरे, 60-60 करोड़ रुपये के साथ मारुति सुजुकी और CESC संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर हैं। इस ट्रस्ट के जरिये सबसे ज्यादा 723.8 करोड़ रुपये का चंदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिला। इसके बाद कांग्रेस को 156.35 करोड़ रुपये, भारत राष्ट्र समिति (BRS) को 85 करोड़ रुपये और YSR कांग्रेस को 72.5 करोड़ रुपये मिले।

ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से 132.5 करोड़ रुपये का चंदा आया। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के माध्यम से दिए गए कुल 132.5 करोड़ रुपये में से 130 करोड़ रुपये 15 फरवरी के बाद आए। पिछले साल ट्रस्ट के माध्यम से केवल 50 लाख रुपये का चंदा आया था जिसमें इस वर्ष काफी उछाल देखने को मिला है। इस ट्रस्ट को सबसे ज्यादा चंदा देने वालों में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट (50 करोड़ रुपये), सीजी पावर इंडस्ट्रियल (30 करोड़ रुपये) और कोरोमंडल इंटरनैशनल (25.5 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसमें से 127.5 करोड़ रुपये BJP को और बाकी 5 करोड़ रुपये द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को मिले।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला माहौल
जयभारत इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए इस वर्ष 9 करोड़ रुपये का चंदा दिया गया, जबकि पिछले साल कोई चंदा नहीं दिया गया था। यह चंदा दो कंपनियों – लक्ष्मी मशीन वर्क्स (8 करोड़ रुपये) और सुपर सेल्स इंडिया (1 करोड़ रुपये) ने दिया। दोनों चंदे सितंबर 2024 में दिए गए। यह चंदा बीजेपी (5 करोड़ रुपये), डीएमके (3 करोड़ रुपये) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) (1 करोड़ रुपये) को गया। इस तरह चुनावी बॉन्ड बंद होने के बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिये राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में काफी इजाफा देखा गया है। यह बदलाव भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।

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