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ट्रंप के आने के बाद भारत-चीन में भी बन रही रणनीति! बीजिंग के दौरे पर जा रहे विदेश सचिव विक्रम मिस्री

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नई दिल्ली

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ले चुके हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया के साथ ही भारत, चीन की नजरें भी अमेरिका पर लगी हुई हैं। इस बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री भारत और चीन के बीच विदेश सचिव-उपमंत्री तंत्र की बैठक के लिए 26-27 जनवरी को बीजिंग का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को इस बात की जानकारी दी गई।

दोनों देशों के बीच किन मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस द्विपक्षीय तंत्र की बहाली भारत-चीन संबंधों के लिए अगले कदमों पर चर्चा करने के लिए नेतृत्व स्तर पर हुए समझौते से उत्पन्न होती है। इसमें राजनीतिक, आर्थिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध शामिल हैं। पिछले महीने, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मिलने के लिए बीजिंग गए थे।

बैठक के दौरान एनएसए डोभाल ने इस बात पर जोर दिया था कि पांच साल के अंतराल के बाद सीमा मुद्दे पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बैठक की बहाली दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए इसका बहुत महत्व है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा समेत अन्य मुद्दे पर सहमति
भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 23वीं बैठक के दौरान भारत और चीन ने सीमा पार सहयोग और आदान-प्रदान के लिए “सकारात्मक दिशा-निर्देश” देने का भी फैसला किया था। इसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीमा पार नदियों और सीमा व्यापार पर डेटा साझा करना शामिल है। इस बैठक में एनएसए डोभाल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भाग लिया था।

रूस में हुई थी मोदी-जिनपिंग मुलाकात
दोनों प्रतिनिधियों ने अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी शहर कजान में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार मुलाकात की थी। इसमें सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के प्रबंधन की देखरेख करने और सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने के लिए बैठकों के भविष्य के पाठ्यक्रम का फैसला किया गया था। पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को बताया था कि भारत-चीन संबंधों को तीन परस्पर विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता पर आधारित होना चाहिए।

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