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Friday, June 5, 2026
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बीजेपी ही नहीं, दिल्ली में कांग्रेस का त्रिकोण बिगाड़ सकता है AAP का भी गणित, पार्टी का सिरदर्द समझिए

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नई दिल्ली

दिल्ली की सत्ता पर 10 वर्षों से काबिज आम आदमी पार्टी की नजर इस बार जीत की हैटट्रिक पर है लेकिन राह आसान नहीं लग रही। उसके रास्ते को बीजेपी चट्टान बनकर रोकने के लिए भले ही पूरा जोर लगा रही है लेकिन कांग्रेस का त्रिकोण टीम अरविंद केजरीवाल के लिए उससे भी बड़ी बाधा के रूप में दिख रहा है। आम आदमी पार्टी इस बात को अच्छे से जानती है कि अगर कांग्रेस मजबूत हुई तो उसका सीधा नुकसान उसे ही उठाना पड़ेगा। उसे डर ये नहीं कि कुछ सीटों पर कांग्रेस जीत जाएगी, बल्कि डर ये है कि बीजेपी बाजी मार ले जाएगी।

क्या कांग्रेस अपना रही नरम रुख?
कुछ दिन पहले टीवी न्यूज चैनल पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस की आक्रामकता से डरी हुई है। उन्होंने ये तक दावा किया कि दिल्ली कांग्रेस के हमलावर तेवरों के बाद अरविंद केजरीवाल ने इंडिया गठबंधन के बाकी नेताओं के जरिए कांग्रेस आलाकमान को AAP के खिलाफ नरम रुख अपनाने के लिए मनाने की कोशिश की थी। उनके दावे पर यकीन करें तो उसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली यूनिट के नेताओं को आम आदमी पार्टी के खिलाफ हमलावर रुख अख्तियार नहीं करने का संदेश भेजा था। ये बात तब की है जब अजय माकन ने केजरीवाल को ‘देशद्रोही’ कहा था। यूथ कांग्रेस ने महिला सम्मान योजना और बुजुर्गों के लिए कथित हेल्थ स्कीम के लिए AAP कार्यकर्ताओं की तरफ से घर-घर जाकर रजिस्ट्रेशन करने को जनता के साथ धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। संदीप दीक्षित भी लगातार AAP और केजरीवाल पर हमले कर रहे थे। चौरसिया ने दावा किया कि आलाकमान से संदेश मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं का AAP पर हमलावर रुख नरम हुआ।

तो क्या सच में कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी के खिलाफ नरम रुख अख्तियार कर रही है? ऐसा दिखता तो नहीं है। पार्टी नेताओं का AAP के खिलाफ हमलावर रुख बदस्तूर जारी है। कभी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तो कभी वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए पार्टी के नेता AAP के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। हालांकि, चुनाव प्रचार के बीच राहुल गांधी की तबीयत का खराब होना कांग्रेस के लिए झटके की तरह है। खराब सेहत की वजह से उनकी अबतक दो रैलियां रद्द हो चुकी हैं। दिल्ली के चुनाव प्रचार युद्ध में अबतक प्रियंका गांधी वाड्रा की भी एंट्री नहीं हुई है।

कांग्रेस से डरी हुई है AAP!
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को बीजेपी से कहीं ज्यादा कांग्रेस का डर सता रहा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने बिना नाम दिए AAP के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया है कि पार्टी को इसकी चिंता नहीं है कि कांग्रेस कुछ सीटें छीन लेगी, बल्कि ये है कि वह बीजेपी को मजबूत करने में मदद करेगी।

आम आदमी पार्टी के नेता अपनी रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस दिल्ली में बीजेपी को मदद पहुंचा रही है। सीएम आतिशी और संजय सिंह तो ये तक आरोप लगा चुके हैं कि कांग्रेस के उम्मीदवार बीजेपी दफ्तर से चुने जा रहे हैं। कई कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए बीजेपी फंडिंग कर रही है, ऐसा उनका आरोप है।

कुछ सीटों पर AAP और कांग्रेस में तगड़ा मुकाबला
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ओखला, चांदनी चौक और बादली समेत लगभग 10 सीटों पर कांग्रेस के अभियान पर कड़ी नजर रखे हुए है। AAP को इन सीटों पर कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। ओखला में AAP के अमानतुल्लाह खान के खिलाफ कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ अहमद खान की बेटी अरीबा खान चुनाव मैदान में हैं। चांदनी चौक में मौजूदा विधायक प्रह्लाद सिंह साहनी के बेटे AAP के पुनर्दीप सिंह साहनी के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल मैदान में हैं। बादली से दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव AAP के मौजूदा विधायक अजेश यादव के को चुनौती दे रहे हैं।

2017 के एमसीडी चुनाव वाली कहानी है AAP के डर की वजह!
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में AAP के एक सीनियर लीडर को उनका नाम गुप्त रखते हुए कोट किया है, ‘हमारे लिए चिंता की बात यह नहीं है कि कांग्रेस सीट जीत लेगी, बल्कि यह है कि वह BJP को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी। BJP के लिए, जो 27 सालों से दिल्ली विधानसभा में सत्ता से बाहर है, यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के वोट शेयर में वृद्धि से उन्हें ही मदद मिलेगी।’

AAP नेता के हवाले से अखबार ने लिखा है, ‘2017 के MCD चुनावों में क्या हुआ था, उसी को देख लीजिए। AAP ने दो साल पहले ही विधानसभा चुनाव 54% वोट शेयर के साथ जीता था और कांग्रेस 10% पर सिमट गई थी। लेकिन कांग्रेस ने MCD चुनाव अच्छी तरह लड़ा। AAP का वोट शेयर गिरकर 26% हो गया, जबकि कांग्रेस का 21% हो गया। बीजेपी का वोट शेयर केवल 4 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन उसने चुनाव में जीत हासिल की।’

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