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क्या यमुना के ‘जहर’ ने चंबल के 110 घड़ियालों को मार डाला, 16 साल बाद कैसे खुला राज?

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नई दिल्ली

यह 2008 की बात है। मध्य प्रदेश की चंबल नदी में एक के बाद एक करके घड़ियाल मर रहे थे। उस वक्त कोई भी यह नहीं समझ पाया कि ऐसा क्यों हो रहा है। यमुना की सहायक नदी चंबल नदी के किनारे 110 एशियाई घड़ियाल मरे पाए गए। इन मौतों ने उस वक्त पर्यावरण और पशु प्रेमियों को हिलाकर रख दिया। उस वक्त दुनिया की इकलौती जंगली घड़ियाल आबादी को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर जंग शुरू हो गई। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर यमुना में जहर मिलाने का आरोप लगाया, जिसके बाद से दिल्ली चुनाव का दंगल एक नदी पर आकर सिमट गया। जानते हैं इस यमुना की गंदगी के बारे में और केजरीवाल के आरोपों की सच्चाई।

घड़ियालों की मौत के बाद बनी इंटरनेशनल टास्क फोर्स
2008 की उस घटना के बाद एक अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स बनी, जिसके बाद घड़ियाल पारिस्थितिकी परियोजना का जन्म हुआ। इसका नेतृत्व मशहूर ‘भारत के स्नेकमैन’ और मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट के संस्थापक रोमुलस व्हिटेकर और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड, पुणे इंडिया के ध्रुव ज्योति बसु और अमेरिका में नॉर्थ डकोटा विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्रोफेसर जेफरी लैंग ने किया था। नीचे दिए ग्राफिक में MLD का अर्थ है MegaLiters per Day है, जिसे मिलियन लीटर्स पर डे भी कहा जाता है।

16 साल की रिसर्च के बाद पता चला मौतों का राज
घड़ियाल के आवास और व्यवहार पर 16 साल तक शोध करने के बाद जेफरी लैंग और उनकी टीम 2008 में उनकी सामूहिक मृत्यु की वजह को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं थे। चूंकि उस समय घड़ियाल के जीव विज्ञान के बारे में बहुत कम जानकारी थी, इसलिए उनकी अचानक मृत्यु पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लिए भी एक रहस्य थी। उनकी रिसर्च में यह पता चला कि ये जीव यमुना के प्रदूषित पानी के संपर्क में आने के बाद मर गए थे। यमुना में जहरीले पदार्थों की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि उसका पानी जहरीला हो चुका है। यमुना की ही सहायक नदी चंबल है।

यमुना में 122 नालों का गंदा पानी बहाया जा रहा है
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (DPCC) के मुताबिक दिल्ली क्षेत्र में यमुना में 122 नालों का गंदा पानी बहाया जा रहा है। इनमें भी सबसे अधिक गंदगी नजफगढ़ नाला के जरिये डाली जा रही है। यह नाला अकेले ही दिल्ली में यमुना के 80 फीसदी पानी को प्रदूषित कर रहा है। दिल्ली में यमुना की लंबाई करीब 22 किलोमीटर है। इस 22 किलोमीटर की लंबाई में छोटे-बड़े 122 नालों से बिना ट्रीट किए ही सीवरेज के रूप में करी 184.9 एमजीडी गंदा पानी प्रतिदिन डाला जा रहा है। जो यमुना में लगातार बढ़ते प्रदूषण की सबसे अहम वजह है।

बीते 7 साल में 7 हजार करोड़ खर्च, पर यमुना बनी नाला
केंद्र सरकार ने 2015 से लेकर 2023 की पहली छमाही तक यमुना की सफाई के लिए दिल्ली जल बोर्ड को करीब 1200 करोड़ रुपए दिए थे। इसके बावजूद यमुना स्वच्छ नहीं हो पाईं। क्योंकि किसी भी नाले के पानी की ट्रीट करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यमुना की सफाई के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार ने पिछले 7 साल में 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की है। इसके बावजूद आज यमुना अपवित्र हो गई हैं।

शहरों के नालों के चलते यमुना बनी अपावन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक यमुना नदी के प्रदूषण का मुख्य जरिया शहरों के नाले हैं जिसे यमुना में छोड़ा जाता है। दिल्ली सहित यमुनानगर, जगाधरी, करनाल, पानीपत, सोनीपत, दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, पलवल, वृंदावन, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा जैसे शहर गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं।

दिल्ली में यमुना का बस 2 फीसदी हिस्सा
जानकारी के मुताबिक युमना सात राज्यों से होकर बहती है। इसकी कुल लंबाई के 1376 किलोमीटर के हिस्से में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में इसका हिस्सा करीब 21 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश में यमुना का कुल हिस्सा 1.6 प्रतिशत, हरियाणा में 6.1 प्रतिशत, राजस्थान में 29.8 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 40 प्रतिशत और दिल्ली में सबसे कम करीब 2 प्रतिशत यमुना का हिस्सा है।

यमुना की कुल गंदगी का 70 फीसदी दिल्ली में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक यमुना का पहला हिस्सा यमुनोत्री से लेकर ताजेवाला तक 172 किलोमीटर बेहद साफ है। दूसरे हिस्से में यमुना ताजेवाला से वजीराबाद बैराज तक इसकी लंबाई 224 किलोमीटर है। इस दौरान यमुना उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों व कस्बों के पास होकर बहती है। यहां का पानी दिल्ली के मुकाबले बेहद साफ होता है। जबकि वजीराबाद से लेकर ओखला बैराज के बीच 22 किलोमीटर के हिस्से में यमुना सबसे अधिक प्रदूषित नदी है। कुल गंदगी का 70 प्रतिशत यमुना में यहीं से मिलता है। चौथे हिस्से में यमुना ओखला से लेकर चंबल तक सबसे लंबी यात्रा करती है। यह हिस्सा 490 किलोमीटर का है।

केजरीवाल ने जहर वाला क्या बयान दे डाला
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘भाजपा ने ऐसी हरकत की है जो दुनिया के इतिहास में कभी नहीं हुई। दिल्ली के लोगों को पीने का पानी और हरियाणा और दिल्ली से मिलता है। हरियाणा से पानी यमुना से आता है। हरियाणा की भाजपा सरकार ने यमुना से आने वाले पानी में जहर मिलाकर भेज दिया। भला हो दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियर्स का कि उन्होंने इसे पकड़ लिया। उन्होंने इसे बॉर्डर पर ही रोक दिया। यदि यह पानी दिल्ली में आ जाता और पीने के पानी में मिल जाता तो ना जाने कितने लोगों की दिल्ली में मौत हो जाती, नरसंहार हो जाता। इसमें उन्होंने ऐसा जहर मिलाकर भेजा है कि दिल्ली के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में सफाई नहीं हो सकती है। इस वजह से एक तिहाई दिल्ली में पीने के पानी की कमी हो गई है।’

दिल्ली जल बोर्ड ने क्यों कहा-जहर की बात झूठी
केजरीवाल के दावे का दिल्ली जल बोर्ड ने खंडन करते हुए उसे ‘झूठा’ करार दिया है। दिल्ली जल बोर्ड की सीईओ ने दिल्ली के मुख्य सचिव को इस बारे में लेटर भी लिखा है। दिल्ली जल बोर्ड ही यमुना के पानी की जांच, सफाई के बाद आपूर्ति का काम करता है।

जिसे जहर बताया, आखिर वो क्या चीज है
केजरीवाल ने जिसे ‘जहर’ बताया वह जहरीला केमिकल अमोनिया है। दरअसल, केजरीवाल से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दिल्लीवालों का पानी बाधित करने के लिए बीजेपी की हरियाणा सरकार सभी फैक्टरियों का प्रदूषण यमुना में छोड़ रही है। केजरीवाल ने संभवत: इसी के लिए जहर का इस्तेमाल किया होगा।

यमुना में अमोनिया बढ़ने से जान का खतरा नहीं
यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ने से पानी में प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है, मगर इससे जान जाने का खतरा नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि यमुना में हर साल सर्दियों में अक्टूबर से फरवरी के बीच अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसा फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी और सीवर को बिना ट्रीट किए यमुना में गिराए जाने से होता है। सर्दियों में नदी की धारा में प्रवाह कम होने की वजह से प्रदूषक एजेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है।

भाजपा ने क्यों कहा-केजरीवाल कालिया नाग
भाजपा की हरियाणा इकाई ने भी केजरीवाल के यमुना में जहर के दावे पर तीखा हमला किया। एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया, केजरीवाल इस बात के बेहतरीन उदाहरण हैं कि कोई व्यक्ति अपने तुच्छ और दुष्ट राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए किस हद तक गिर सकता है। हरियाणा भाजपा ने केजरीवाल को कलयुग का कालिया नाग बताते हुए कहा, दुर्भाग्य से हरियाणा की धरती पर पैदा हुआ यह कृतघ्न बेटा हरियाणा के लोगों को जी भरकर गाली देता है, ताकि दिल्ली चुनाव में राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

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