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Thursday, March 26, 2026
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भारत और चीन ने मान ली एक दूसरे की बात,इस साल से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, बस अब कर लें तैयारी

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विदेश मंत्रालय (MEA) की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, भारत और चीन 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। शिव भक्तों के लिए ये बहुत बड़ी खुशखबरी है। भारत-चीन में बनी सहमति से अब श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे। बता दें, भारत और चीन के संभावित है कि इन्ही गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हो जाएगी।

सटीक तारीख की घोषणा भी जल्द की जाएगी। साल 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा और दोनों देशों के बीच फ्लाइट सर्विस 2020 से बंद थी। जिसकी वजह दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और कोरोना वायरस था, लेकिन अब उम्मीद है कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल गर्मियों में शुरू की जाएगी। अगर आप भी कैलाश मानसरोवर यात्रा करना चाहते हैं, तो पहले ये जरूरी जानकारी जान लीजिए।

कैलाश मानसरोवर कब होती है?
​कैलाश मानसरोवर यात्रा में हिन्दू काफी आस्था रखते हैं। साल 2020 तक हर साल जून से सितंबर तक कैलाश मानसरोवर यात्रा की जाती थी। इस साल भी जून के महीने में यात्रा शुरू होने की उम्मीद बताई जा रही है। हिंदू मान्यताओं में ‘मानसरोवर’ को वो झील बताया गया है जिसे भगवान ब्रह्मा ने अपने में बनाया था। मान्यता है कि कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है जहां वह देवी पार्वती के साथ रहते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा कहां से शुरू होती है?
सड़क से कैलाश मानसरोवर की यात्रा नेपाल और भारत से की जाती है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में सड़क से यात्रा शुरू होती है। तीर्थ यात्री काठमांडू के लिए डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। बता दें, कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम की राज्य सरकारों के सहयोग से आयोजित की जाती है और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का सहयोग होती है। इसी के साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा हेलीकॉप्टर द्वारा भी पूरी की जा सकती है |

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वीजा जरूरी है?
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय हो या विदेशी, हर किसी को वीजा की जरूरत होती है, क्योंकि कैलाश पर्वत तिब्बत में है और तिब्बत पर चीन का कब्जा है, ऐसे में इस यात्रा के लिए पासपोर्ट और चीन का वीजा भी जरूरी होता है। इसी के साथ बता दें, इस यात्रा को करने के लिए परमिट भी लेना होगा है। तिब्बती सरकार केवल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए विशेष तिब्बत परमिट प्रदान करती है। इसी के साथ बता दें, यात्रा के डॉक्यूमेंट्स की आवश्यकता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप कैलाश पर्वत की यात्रा कहां से कर रहे है |

कैलाश मानसरोवर यात्रा में कितने दिन लगते हैं?
कैलाश मानसरोवर यात्रा दो से तीन सप्ताह तक लग जाते हैं, लेकिन इस पर निर्भर करते हुए कि आप यात्रा कहां से शुरू कर रहे हैं। भारत सरकार ने इस यात्रा को आसान बनाने के लिए ‘लिपुलेख मार्ग’ बनाया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई 2020 को इस मार्ग का उद्घाटन किया था। बता दें, ‘लिपुलेख मार्ग’ से कैलाश पर्वत लगभग 100 किमी दूर है।

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