नई दिल्ली
संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी को शुरू हुआ महाकुंभ मेला ठीकठाक संचालित हो रहा था, लेकिन 28 जनवरी की रात भगदड़ मच गई। घटना में कुछ श्रद्धालुओं के स्वर्गवासी होने जबकि कुछ के घायल होने की खबर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ संतों-महंतों से भी अपील की है कि वो अफवाहों पर ध्यान न दें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि श्रद्धालु संगम नोज पर ही स्नान करने की जिद्द न पालें ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका पैदा नहीं हो। उधर, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने मेले में कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बदइंतजामी को ही भगदड़ के लिए जिम्मेदारी ठहराया है। आइए जानते हैं कि महाकुंभ में मेले को व्यवस्थित रखने के लिए किस तरह का प्रबंधन किया गया है।
व्यवस्था पर सवाल
दूसरी तरफ, विपक्ष कमियां गिनाने में लगा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि यह भगदड़ अव्यवस्था के कारण मची। वहीं, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दावा किया कि महाकुंभ में ‘इस दुखद घटना के लिए कुप्रबंधन, बदइंतजामी और आम श्रद्धालुओं की जगह VIP मूवमेंट पर प्रशासन का विशेष ध्यान होना जिम्मेदार है।’
संजय राउत ने यूपी सरकार पर साधा निशाना
शिवसेना (UBT) नेता ने कहा,’यूपी सरकार सिर्फ कुंभ मेले की मार्केटिंग पर ध्यान दे रही थी. भक्तों की सुविधाओं की सही व्यवस्था नहीं की गई. गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जब स्नान के लिए गए तो पूरा इलाका सील कर दिया गया, जिससे आम श्रद्धालुओं को परेशानी हुई. यूपी के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को पार्टी के प्रचार के बजाय भक्तों की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए था. सरकार ने आपात बैठकें बुलाईं, लेकिन इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा. सड़क पर सोने के बाद भक्तों को स्नान करना पड़ा, यह कैसा प्रबंधन है? 1954 में पंडित नेहरू ने खुद कुंभ मेले की व्यवस्थाओं की जांच की थी, लेकिन आज के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उस तरह सक्रिय नहीं दिख रहे.’
छह दिन विशेष स्नान
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 45 दिन चलने वाले महाकुंभ मेले में प्रति दिन औसतन 1 करोड़ लोगों के आने का अनुमान लगाया है। पौष पूर्णिमा (13 जनवरी), मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (29 जनवरी), बसंत पंचमी (03 फरवरी), माघी पूर्णिमा (12 फरवरी), महा शिवरात्रि (26 फरवरी) जैसे प्रमुख दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया। इन दिनों में भी सबसे ज्यादा भीड़ 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन होने की बात सबको पता थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि करीब 6 करोड़ श्रद्धालु मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ मेले में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सरकार ने 10 करोड़ लोगों के प्रबंधन की व्यवस्था की है।
मौनी अमावस्या पर सबसे ज्यादा भीड़
अनुमान के मुताबिक, मौनी अमावस्या के दिन देश-दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु महाकुंभ में पवित्र स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे। भारी भीड़ के कारण बुधवार की रात ही स्नान होने लगा। प्रयागराज में जिस जगह गंगा-यमुना और विलुप्त सरस्वती नदी का संगम हुआ है, वहीं साधु-संत स्नान करते हैं। इस वजह से इसे प्रयागराज का पवित्रतम घाट माना जाता है। इसी घाट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और रात करीब डेढ़ बजे संगम नोज पर भगदड़ मच गई। अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपील की कि श्रद्धालु जिस घाट पर जगह मिले, उधर ही जाएं ना कि किसी एक घाट पर ही स्नान करने की होड़ में जुट जाएं।
मौनी अमावस्या के लिए विशेष तैयारी भी
प्रयाराज महाकुंभ के लिए करीब हेक्टेयर में मेला क्षेत्र बनाया गया है। मौनी अमावस्या को भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाकर ही नदी किनारों पर जगह बढ़ाई गई थी ताकि हर घंटे दो लाख श्रद्धालु स्नान कर सकें। पहले यह क्षमता 50 हजार श्रद्धालुओं की ही थी। भीड़ इतनी ज्यादा आई कि सुबह तक ही तीन करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में स्नान कर लिया।
जिला घोषित हुआ महाकुंभ क्षेत्र, सुरक्षा के भारी इंतजाम
उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ मेला परिसर को राज्य का 76वां जिला ही घोषित कर दिया। करीब 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बसे महाकुंभ नगरी को 25 सेक्टर में बांटा गया है। इनमें 56 थाने और 144 चौकियां बनाई गई हैं और सुरक्षा बलों के करीब 40 हजार जवान तैनात हैं। हर थाने में साइबर डेस्क है। इतना ही नहीं, दो साइबर थाने भी अलग से बनाए गए हैं। महाकुंभ के एसएसपी राजेश द्विवेदी ने बताया था, ‘सिविल पुलिस, पीएसी, एनएसजी, एसटीएफ, होमगार्ड, डिफेंस और एनजीओ को मिलाकर मेले में 50 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।’ महाकुंभ सात स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है जिनमें एनएसजी कमांडो और यूपी पुलिस के जवानों की तैनाती है।
जवानों के साथ-साथ ड्रोन और AI कैमरे भी तैनात
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेले में एआई युक्त कैमरे लगे हैं जो लोगों की गिनती करते हैं। अगर किसी इलाके में 2 हजार लोगों के खड़े होने की जगह है तो 1,800 लोग होते ही संबंधित अफसर को जानकारी हो जाएगी। इसके अलावा, 100 फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड में पहले से संदिग्धों को आसानी से चिह्नित किया जा सकेगा। 2,700 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, ड्रोन से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी हो रही है। पानी के अंदर की सुरक्षा के लिए पहली बार नदी के अंदर 8 किलोमीटर तक डीप बैरिकेडिंग की गई है। मेले में अगर कोई खो जाए तो मदद के लिए हाईटेक 10 खोया-पाया केंद्र हैं।
सुरक्षा ही नहीं, सुविधा भी
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मेला क्षेत्र में लगभग 1.50 लाख टेंट, तीन हजार रसोई, 1.45 लाख शौचालय, 300 मोबाइल शौचालय और 100 से अधिक पार्किंग स्थल बने हैं। इनके अलावा, प्रयागराज के बुनियादी ढांचे के विकास और सौंदर्यीकरण में लगभग 7,000 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। 14 रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज के साथ-साथ 61 सड़कें बनाई गई हैं। इनके अलावा, 40 चौराहों का सौंदर्यीकरण और रेलवे लाइन विस्तार का निर्माण हुआ है। वहीं, 30 पांटून पुल बने। इनमें 15 पुल संगम के बिल्कुल करीब बनाए गए हैं। 41 घाटों पर करीब 10 हजार चेंजिंग रूम हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी गाटों पर 300 से अधिक गोताखोर तैनात हैं।
प्रधानमंत्री मोदी हुए ऐक्टिव
इतनी व्यापक व्यवस्था के बावजूद भगदड़ मची तो यूपी ही नहीं, केंद्र सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चार बार बात की।
महाकुंभ से अर्थव्यवस्था को गति
शांत और सुरक्षित महाकुंभ मेले के आयोजन पर करीब 7,500 करोड़ रुपया खर्च होने की बात की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ का बजट 5,060 करोड़ रुपये तय किया जबकि केंद्र सरकार ने 2,100 करोड़ रुपये दिए हैं। अनुमान है कि महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की धार्मिक अर्थव्यवस्था 3.02 लाख करोड़ रुपये है जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 2.3 % है।
महाकुंभ की वजह से न केवल इन क्षेत्रों बल्कि प्रयागराज और यूपी की अर्थव्यवस्था भी चमकने लगी है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, उत्तर प्रदेश को 45 दिवसीय मेगा इवेंट से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमाई होने की संभावना है। हालांकि, कुछ अनुमानों के अनुसार, महाकुंभ में आने वाले प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे कुल 4 लाख करोड़ रुपये तक की आर्थिक गतिविधि पहुंच सकती है। इससे राज्य की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है।
भगदड़ के बाद ट्रेनों को लेकर रेलवे ने दिया स्पष्टीकरण
महाकुंभ में भगदड़ की घटना के बाद प्रयागराज स्टेशन की मौजूदा स्थिति को लेकर रेलवे बोर्ड के पीआरओ दिलीप कुमार ने कहा कि रेलवे ने इस महाकुंभ के लिए अपनी व्यापक योजना जो बनाई थी उसके अनुसार हम लोग काम कर रहे हैं. आज मौनी अमावस्या का दिन है, आज हमारी प्लानिंग थी कि मौनी अमावस्या में स्नान करने के बाद जब श्रद्धालु अपने घरो की और रवाना होंगे तो वहां से अनरिजर्व्ड क्लास की ट्रेन अधिक संख्या में चले जिससे ज्यादा लोग सफर कर सकें. लेकिन आधीरात के बाद जब ये घटना घटी तो एक-दो ट्रेनों को कुछ समय के लिए रेगुलेट किया गया था. अब उसे ठीक कर दिया गया है यानी कि कुछ ट्रेनों को होल्ड पर रखा गया था.
