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मराठी पशुपति व्रत करते हैं और सबसे ज्यादा मछली सुखाकर खाते हैं…बवाल हुआ तो कथा वाचिका देवी भव्या ने मांगी माफी

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अहमदाबाद/सूरत

कथाकार वाचिका देवी भव्याजी मैथलानी मराठी समाज के ऊपर टिप्पणी करके विवादों में आ गई हैं। सूरत में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और दिव्य झांकियो के कार्यक्रम में उन्होंने मराठी समाज द्वारा किए जाने वाले पशुपति व्रत और पशुपति पूजा पर विवादित बयान दिया। देवी भव्याजी मैथलानी ने कहा कि आज के समय में सबसे ज्यादा मराठी लोग पशुपति व्रत करते हैं और सबसे ज्यादा वहीं लोग खाते हैं। उन्होंने कहा कि सुखाकर (मछली) वे खाते हैं। इसके चलते इतनी स्मैल आती है। मैं गुजराती एरिया में रहती हूं लेकिन उस दिन लगता है अब मृत्यु दे दो गोविंद। इससे अच्छा मर जाए। महाराष्ट्र में कोकण में मछली फूड के फेमस है। देवी भव्या झाा राम कथा, शिव कथा, श्रीमद भागवत कहती हैं।

मराठी समाज पर क्या बोलीं देवी भव्या
देवी भव्या जी ने यह भी कहा कि बुरा लगेगा। आप मुझे डंडे से मारेंगे क्यों सत्य बोलने वाले को मारा जाता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा मराठी खाता है सूखा-सूखाकर और सबसे ज्यादा पशुपति व्रत ये मराठी लोग ही करते हैं। घूम-घूमकर हलवा पूड़ी लगाकर भोले बाबा को मानना चाहते हैं कि प्रभु जी बख्श दो। कैसे बख्श दें। कोई मेरे बेटे को मारकर देखे। इस बयान के तूल पकड़ने और वायरल होने पर देवी भव्या बैकफुट पर आ गई हैं। उन्होंने कथा के बाद एक वीड़ियो रिलीज करके कहा है कि राधे-राधे ….कल मैंने मराठी समाज को लेकर कुछ कहा था। मैंने कहा था कि अगर पशुपति व्रत और धर्म कर रहे तो मत खाओ। उन्होंने कहा कि अगर इस बात से मराठी समाज को ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा चाहती हूं। देवी भव्याजी सूरत की देवध-कुंभारिया रोड पर सूडा सहकार रेजीडेंसी सेवा समिति की तरफ से आयोजन में बोल रही थीं। यह आयोजन 1 फरवरी तक चलेगा।

क्या है पशुपति व्रत?
पशुपतिनाथ व्रत भगवान भोलेनाथ को समर्पित व्रत है जो सोमवार के दिन रखा जाता है। मान्यताओं अनुसार इस व्रत को रखने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। पशुपतिनाथ व्रत किसी भी महीने के सोमवार से प्रारंभ किया जा सकता है। यह व्रत लगातार 5 सोमवार तक किया जाता है. इसका मतलब यह कि पहले सोमवार से आखिरी सोमवार तक के बीच में कोई भी सोमवार छूटना नहीं चाहिए. इसके अलावा आपको यह भी ध्यान रखना है कि पहले सोमवार की पूजा जिस मंदिर में की है उसी मंदिर में अगले चारों सोमवार की भी पूजा करना होती है। इस पूजा में सर्वप्रथम भगवान भोलेनाथ को गंगाजल मिले हुए जल से स्नान कराना होता है। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से एक -एक करके सभी चीजों से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कराया जाा है। जब सभी अभिषेक पूर्ण हो जाए तो अंत में फिर स्वच्छ जल से महादेव को स्नान कराना होता है।

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