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लीगल प्रोफेशन में वर्क लाइफ बैलेंस ऐसा होता है क्या? पूर्व चीफ जस्टिस बोबडे की बेटी ने फोटो शेयर करते हुए उठाए ये सवाल

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नई दिल्ली

सोशल मीडिया पर पूर्व चीफ जस्टिस एसए बोबडे की एक तस्वीर को लेकर खूब चर्चा हो रही है। यह तस्वीर अस्पताल के बेड पर की है। तस्वीर में पूर्व सीजेआई हॉस्पिटल में बेड पर लेटे नजर आ रहे हैं। तस्वीर में वे सूट पहने हुए हैं। इस तस्वीर को पूर्व चीफ जस्टिस की बेटी ने ही पोस्ट किया है। तस्वीर पोस्ट करने के साथ ही पूर्व सीजेआई की बेटी सावित्री बोबडे ने अहम सवाल भी उठाएं हैं। सावित्री ने कानूनी पेशे से जुड़े लोगों जैसे वकीलों और जजों की वर्क लाइफ बैलेंस पर सवाल पूछा है।

आखिर क्या लिखा सावित्री ने...
पोस्ट के अनुसार, वह अस्पताल से ही मध्यस्थता सत्र (arbitration from hospital) की तैयारी कर रहे हैं, जहां उन्होंने सर्जरी के लिए अपने पिछले चार सप्ताह बिताए हैं। सावित्री ने लिखा, ‘लगभग 70 साल के पिताजी अस्पताल के बिस्तर से एक सप्ताह की मध्यस्थता के लिए तैयार हैं, जहां उन्होंने पिछले चार सप्ताह बिताए हैं। उनकी चौथी सर्जरी (तीसरी अनियोजित) के बाद, ये सब पिछले 8 महीनों में हुआ है। उनके शरीर से नलियां निकल रही हैं और वे दिन के अधिकांश समय दर्द में रहते हैं। क्या कोई वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना चाहता है?

वकीलों, जजों के वर्क-लाइफ बैलेंस पर काफी चर्चा
वकीलों और जजों के बीच काम और जीवन के बीच संतुलन पर काफी बहस होती रही है। पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने जनवरी 2023 में कहा था कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को बर्नआउट का महिमामंडन करना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर दुख जताया था कि कानूनी पेशे से जुड़े लोग अपनी नौकरी से जुड़े अतिरिक्त लंबे घंटों पर गर्व करते हैं।

इससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। उन्होंने वकीलों के कानूनी कार्यालयों और चैंबरों में बेहतर काम के घंटे और काम और जीवन के बीच संतुलन की वकालत की थी। सीजेआई ने अपनी दिवंगत पूर्व पत्नी के अनुभव को याद किया था, जो खुद एक वकील थीं।

नागपुर बेंच में 21 साल तक प्रैक्टिस
सीजेआई बोबडे का जन्म 1956 में हुआ था। उन्होंने 1978 में वकील के रूप में नामांकन कराया था। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में 21 साल से अधिक समय तक प्रैक्टिस की। 1998 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नामित किया गया। उन्हें मार्च 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट का जज बनाया गया। अक्टूबर 2012 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उन्हें 12 अप्रैल, 2013 को सुप्रीम कोर्ट में प्रोमोट किया गया। 18 नवंबर, 2019 को सीजेआई के रूप में शपथ दिलाई गई। वह 23 अप्रैल, 2021 को सीजेआई के रूप में रिटायर्ड हुए।

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