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Wednesday, March 25, 2026
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न डेटा डिलीट करो, न ही रीलोड…ईवीएम पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को और क्या-क्या आदेश दिए?

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में ईवीएम-वीवीपैट को लेकर ऐतिहासिक फैसला दिया था। उसमें चुनाव आयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश थे कि क्या करना है, क्या नहीं और कैसे अगर किसी जगह वोटिंग के डेटा की वेरिफिकेशन की मांग हुई तो उसकी पुष्टि होगी। लेकिन असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि ईवीएम को लेकर शीर्ष अदालत ने अप्रैल 2024 में जो गाइडलाइंस तय की थी, आयोग उसके हिसाब से काम नहीं कर रहा। उसका स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक नहीं है। अब शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से इस पर जवाब मांगा है। उसने आयोग से ये भी कहा है कि वेरिफिकेशन के वक्त वह न तो ईवीएम का डेटा डिलीट करे और न ही रीलोड करे। शीर्ष अदालत ने वेरिफिकेशन के लिए आयोग की तरफ से तय किए गए 40 हजार रुपये के शुल्क को भी ज्यादा बताया। मामले में अगली सुनवाई अब 3 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने अपनी अर्जी में मांग की है कि ECI इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की बर्न्ट मेमोरी और सिंबल लोडिंग यूनिट्स की जांच की अनुमति दे।

क्या होती है बर्न्ट मेमोरी?
दरअसल, बर्न्ट मेमोरी ईवीएम के डेटा को सुरक्षित रखता है और इसका मतलब है कि प्रोग्रामिंग चरण पूरा होने के बाद मेमोरी को स्थायी रूप से लॉक कर देना। इससे उनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो पाएगी। ये डेटा 10 साल से भी ज्यादा समय तक स्टोर रह सकते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, ईवीएम में जिस प्रोग्राम (सॉफ्टवेयर) का इस्तेमाल होता है वो वन टाइम प्रोग्रामेबल/मास्क्ड चिप के तौर पर बर्न्ट होते हैं ताकि उन्हें बदला न जा सके और न ही छेड़छाड़ की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने आयोग को निर्देश दिया कि वेरिफिकेशन के दौरान EVM का डेटा न तो मिटाएं और न ही रीलोड करें। ADR की अर्जी में कहा गया कि EVM वेरिफिकेशन के लिए ECI का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अप्रैल 2024 के EVM-VVPAT केस के फैसले के मुताबिक नहीं है।

वोटिंग के बाद ईवीएम बनाने वाली कंपनी का इंजीनियर मशीन की जांच करे
सुनवाई के दौरान, CJI ने ECI के वकील से कहा कि अप्रैल 2024 के फैसले में EVM का डेटा मिटाने या रीलोड करने की कोई मंशा नहीं थी। बेंच ने कहा कि उनका सिर्फ ये मतलब था कि वोटिंग के बाद EVM बनाने वाली कंपनी का एक इंजीनियर मशीन की जांच करे।

आप डेटो क्यों मिटाते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा
CJI ने ECI के वकील से पूछा, ‘आप डेटा क्यों मिटाते हैं?’ CJI ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट का अप्रैल के फैसले में सिर्फ यही इरादा था कि अगर वोटिंग के बाद कोई सवाल उठाता है, तो इंजीनियर आकर उनकी मौजूदगी में प्रमाणित करे कि बर्न्ट मेमोरी या माइक्रो-चिप्स में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। बस इतना ही। सीजेआई ने आगे कहा, ‘हम इतनी विस्तृत प्रक्रिया नहीं चाहते थे कि आप कुछ रीलोड करें… डेटा न मिटाएं, डेटा रीलोड न करें – आपको बस इतना करना है कि कोई आकर वेरिफाई करे, उन्हें जांच करनी है।’

ईवीएम सत्यापन के लिए तय 40 हजार रुपये का शुल्क बहुल ज्यादा: SC
बेंच ने ECI के वकील से यह भी कहा कि EVM वेरिफिकेशन के लिए ECI द्वारा तय की गई ₹40,000 की लागत ‘बहुत ज्यादा’ है। बेंच ने ECI को एक छोटा हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया जिसमें EVM वेरिफिकेशन के लिए अपनाए गए SOP की व्याख्या की जाए। इसने ECI के वकील के इस बयान को भी दर्ज किया कि EVM डेटा में कोई बदलाव या सुधार नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी बैलट से वोटिंग की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में कई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में चुनाव के दौरान सभी EVM के जरिए डाले गए वोटों का मिलान वोटर-वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) स्लिप से करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाओं को खारिज करते हुए CJI खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने बैलेट पेपर सिस्टम पर वापस लौटने की याचिकाकर्ताओं की मांग को ‘कमजोर, प्रतिगामी और अनुचित’ बताया था। बेंच ने फैसला सुनाया था कि ‘EVM सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता के अनुकूल’ हैं।

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