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NRI के लिए हो रिमोट वोटिंग… रिटायर होने से पहले क्या बोले मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार

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नई दिल्ली

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है जब एनआरआई को उनके स्थानों से वोटिंग करने के लिए सशक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि करीब एक अरब मतदाताओं का विश्वास सर्वोपरि है और यह 75 सालों में निर्मित एक विरासत है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह बात सोमवार को अपने रिटायर्ड होने से एक दिन पहले आयोजित किए गए विदाई समारोह में कही। वह 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। 19 फरवरी को देश को नए मुख्य चुनाव आयुक्त मिल जाएंगे।

टोटलाइजर सिस्टम की जरुरत पर दिया जोर
रिटायर होने से एक दिन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार ने मतदान केंद्र-वार मतदान पैटर्न में गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक योगमापी (टोटलाइजर) सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों प्रवासी मतदाताओं की सुविधा के लिए दूर-दराज के इलाकों में मतदान तंत्र को लेकर आम सहमति आवश्यक है। वोटरों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पोलिंग स्टेशनों पर बायोमेट्रिक पहचान करने का प्रयास किया जाना चाहिए। जिससे की वोटरों की पहचान प्रभावी तरीके से की जा सके।

‘राजनीतिक दलों के खर्चों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग शुरू’
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के खर्चों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग शुरू हो गई है और बेहतर वित्तीय पारदर्शिता और विश्लेषण के लिए इसे अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। राजनीतिक वादों पर उन्होंने कहा कि इसके लिए वित्तीय प्रावधानों को सार्वजनिक तौर पर बताया जाना चाहिए और अदालतों को जल्द फैसला करने की आवश्यकता है।

‘अनियमित सोशल मीडिया एल्गोरिदम चुनाव के लिए खतरा’
कुमार ने कहा कि अनियमित सोशल मीडिया एल्गोरिदम दुनियाभर में चुनावों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम परिभाषा नियमों का एक सेट है जिसका इस्तेमाल कुछ सोशल मीडिया मंच के भीतर उपयोगकर्ताओं के लिए ‘कंटेंट को रैंक’ करने, ‘फ़िल्टर’ करने और व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने चुनावों में शरारतपूर्ण, आधारहीन और रणनीतिक रूप से समयबद्ध आलोचना का मुकाबला करने के लिए चुनाव निकायों की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चुनाव परिणामों को लेकर संदेह जताने पर अफसोस जाहिर किया।

वोटिंग सिस्टम में क्या है दोष?
वर्तमान में मतों की गिनती प्रणाली में, प्रत्येक ईवीएम से परिणाम प्राप्त किया जाता है, फिर प्रत्येक उम्मीदवार के संबंध में डाले गए मतों का योग किया जाता है और परिणाम घोषित किया जाता है। मतगणना की इस प्रणाली का दोष यह है कि उम्मीदवार यह जान सकते हैं कि उन्हें कहां से कितना मत मिले हैं। इससे चुनाव के बाद हिंसा, उत्पीड़न और विपक्षी दलों के समर्थकों को विकास गतिविधियों से बाहर रखने की समस्या पैदा होती है। कुमार ने कहा कि इससे निपटने के लिए आयोग द्वारा पहले से ही विकसित योगमापी जैसी प्रौद्योगिकियां यह सुनिश्चित करेंगी कि प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों का खुलासा नहीं किया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि मेरा मानना है कि इस मामले का पता लगाया जाना चाहिए। राजनीतिक सहमति का प्रयास किया जाना चाहिए और मतदाता गोपनीयता बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा के लिए पायलट आधार पर परीक्षण किया जाना चाहिए।

 

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