नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद को राष्ट्रीय राजधानी की मंडोली जेल से पंजाब और दिल्ली के अलावा किसी अन्य जेल में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि चंद्रशेखर की ओर से पहले दायर की गई इसी तरह की याचिकाओं को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। पीठ ने चंद्रशेखर से कहा कि उसकी शिकायत दिल्ली सरकार के खिलाफ थी और अब शासन बदल जाने से शिकायत भी समाप्त हो जाती है।
‘आपके पास पैसे हैं तो आप मौके ले रहे…’
पीठ ने कहा कि आपके पास खर्च करने के लिए पैसे हैं तो आप मौके ले रहे हैं। यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। आप एक ही तरह की याचिकाएं कैसे दायर करते रह सकते हैं। पीठ ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। हमने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। हालांकि हम यह कहने से खुद को नहीं रोक सकते कि वर्तमान याचिकाकर्ता ने बदली हुई परिस्थितियों की आड़ में एक के बाद एक रिट दायर करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को जमकर सुनाया
चंद्रशेखर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि याचिकाकर्ता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि उसे उसके परिवार से अलग न रखा जाए। उन्होंने चंद्रशेखर को कर्नाटक या उसके निकट किसी जेल में भेजने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा कि हम समाज और उसकी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। आपके मौलिक अधिकारों को दूसरों की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता। देखिए आपने अधिकारियों के खिलाफ किस तरह के आरोप लगाए हैं।
शीर्ष अदालत ने चंद्रशेखर को और क्या कहा
शीर्ष अदालत ने चंद्रशेखर की याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। चंद्रशेखर ने दावा किया था कि उस पर अपनी शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाने के लिए दो कैमरों से निगरानी की गई। उसके वकील ने तर्क दिया कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने चंद्रशेखर की शिकायत पर पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
