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Wednesday, June 3, 2026
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बढ़ रही है शशि थरूर की बेचैनी ! राहुल गांधी से पूछ लिया- पार्टी में मैं करूं क्या, भूमिका तो बताइए

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नई दिल्ली

केरल के तिरुअनंतपुरम से सांसद शशि थरूर अपनी पार्टी के रवैये से नाराज दिख रहे हैं। उन्हें लगता है कि पार्टी संसद की गतिविधियों में उन्हें पीछे धकेल रही है और राज्य के लिए भी उनकी कोई भूमिका तय नहीं कर रही है। यही वजह है कि दिल्ली की हालिया मुलाकात में उन्होंने राहुल गांधी से पूछ ही लिया कि पार्टी में आखिर उनकी भूमिका क्या है? जब वहां भी उन्हें जवाब की जगह मायूसी हाथ लगी तो खबरें आने लगी हैं कि थरूर की बेचैनी बढ़ रही है। तो क्या थरूर बागी हो सकते हैं?

संसद में किनारे हुए थरूर
शशि थरूर 16 वर्षों से राजनीति में हैं। वो डिप्लोमैट रहे और 2009 से कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं। उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री और मानव संसाधन राज्य मंत्री का दायित्व संभाला था। अब पार्टी उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में बोलने भी नहीं देती है। यह थरूर को चुभ रहा है। उन्हें लगता है कि पार्टी उन्हें जानबूझकर हाशिये पर धकेल रही है। लेकिन क्यों?

आखिर थरूर से किस बात की नाराजगी?
कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी विरोधियों की तारीफ करने के थरूर के रवैये से नाराज है। हाल ही में थरूर ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति के प्रमुख विरोधियों की प्रशंसा की है। थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की उपलब्धियों की जमकर प्रशंसा की है। पहले तो उन्होंने वॉशिंगटन बुलाए जाने को बड़ी बात बताई। थरूर ने 13 फरवरी को मीडिया के सवालों पर कहा, ‘यह बहुत बड़ी बात है कि हमारे प्रधानमंत्री दुनिया के उन नेताओं में शामिल है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना कार्यभार संभालने के एक महीने के अंदर मुलाकात का न्योता दिया। यह अच्छा संकेत है।’

पीएम मोदी के अमेरिका दौरे पर थरूर का बयान
फिर जब उनसे पूछा गया कि पीएम मोदी के अमेरिका दौरे में भारत को क्या मिला तो उन्होंने बेहिचक कहा, वो सबकुछ जो भारत को चाहिए था। थरूर ने कहा, ‘मैं यह कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रम्प दोनों के प्रेस वक्तव्यों से जो कुछ हमने देखा है, वह बहुत उत्साहजनक है क्योंकि ऐसा लगता है कि हम सभी की कुछ बड़ी चिंताओं को संबोधित किया गया है। उदाहरण के लिए, व्यापार और टैरिफ के सवाल पर उन्होंने एक साथ बैठकर एक गंभीर बातचीत करने का फैसला किया है जो इस साल सितंबर-अक्टूबर की शरद ऋतु तक समाप्त हो जाएगी।’ थरूर ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि यह एक बहुत अच्छा परिणाम है क्योंकि डर था कि वॉशिंगटन में कुछ जल्दबाजी में निर्णय लिए जा सकते हैं जिससे हमारे निर्यात प्रभावित होंगे। इस तरह चर्चा और बातचीत के लिए समय है। मैं इसका स्वागत करता हूं।’

कांग्रेस सांसद ने यहां तक कहा कि ट्रंप कभी किसी की प्रशंसा नहीं करते, वो भी मोदी को खुद से बेहतर सौदेबाज बता रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मोदी का खुद से बेहतर वार्ताकार होना आश्चर्यजनक है क्योंकि ट्रम्प को इस बात पर गर्व है कि वे सौदेबाजी की कला में माहिर हैं और उनके प्रशंसकों ने, कल अमेरिका के रक्षा सचिव सहित कहा था कि ट्रम्प दुनिया के सबसे महान वार्ताकार हैं। और यहां ट्रम्प कहते हैं कि मोदी उनसे बेहतर हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हम एक ऐसे व्यक्ति से बहुत अधिक प्रशंसा की उम्मीद कर रहे हैं जो प्रशंसा योग्य बातें कहने के लिए नहीं जाना जाता है। इसलिए यह अच्छी खबर है।’

थरूर के इस बयान का संकेत क्या?
थरूर यहां भी नहीं रुके, उन्होंने ये तक कह दिया कि वो हमेशा पार्टी हित की बात नहीं कर सकते, वो सासंद होने के नाते देश हित की बात भी करेंगे। थरूर बोले, ‘मैं हमेशा पार्टी हित की बात नहीं कर सकता। मैं पार्टी का प्रवक्ता नहीं हूं। मैं तिरुअनंतपुरम की सभी जनता से चयनित होकर सांसद बना हूं। इस आधार पर मैं भारतीय लोकतंत्र के एक जिम्मेदार पक्ष के तौर पर यह बोल रहा हूं।’

जब राहुल पर तंज कसते हुए मोदी ने थरूर का लिया नाम
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए भरे सदन में थरूर का नाम लिया था। पीएम ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा था, ‘कुछ लोगों को लगता है जब तक फॉरेन पॉलिसी नहीं बोलते, तब तक वो मैच्योर नहीं लगते, इसलिए फॉरेन पॉलिसी तो बोलना चाहिए, भले देश का नुकसान हो जाए।’ फिर उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे लोगों को जरा कहना चाहता हूं कि अगर उन्हें सच में फॉरेन पॉलिसी सब्जेक्ट में रुचि है और फॉरेन पॉलिसी समझना है और आगे जाकर कुछ करना भी है… ये मैं शशि जी के लिए नहीं कह रहा हूं।’

राजनीति में इस तरह के जेस्चर का अर्थ निकाला जाता है और थरूर के प्रति पीएम मोदी के इस जेस्चर का भी अर्थ कांग्रेस ने भी निकाला है। दूसरी तरफ, शशि थरूर ने एक लेख में केरल की एलडीएफ सरकार की प्रशंसा कर दी। लेख में राज्य सरकार के औद्योगिक विकास की प्रशंसा की थी, जिससे राज्य में कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष पैदा हो गया।

कांग्रेस में अपनी भूमिका तलाश रहे थरूर
थरूर को ऑल इंडिया प्रफेशनल कांग्रेस (AIPC) के प्रभार से भी हटा दिया गया है। यह संगठन थरूर का ही तैयार किया हुआ है। राहुल गांधी के साथ मुलाकात में थरूर ने इस बात पर भी नाराजगी जताई। खबरें आईं कि उन्होंने राहुल से साफ-साफ कहा संसद में महत्वपूर्ण बहसों के दौरान उन्हें किनारे किया जा रहा है तो क्या पार्टी उन्हें राज्य का राजनीति तक सीमित रखना चाहती है। अगर ऐसा है तो राज्य में उनकी भूमिका क्या होगी, यह उन्हें बता दिया जाए। इस पर राहुल गांधी ने थरूर को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने की परंपरा नहीं है। थरूर युवा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने को भी तैयार थे, लेकिन राहुल गांधी ने इस ऑफर पर भी आनाकानी कर दी।

खरगे के विरोध में चुनाव लड़े थे थरूर
कांग्रेस पार्टी से ऐसी खबरें आ रही हैं तो यह भी याद करना होगा कि गांधी परिवार समर्थित उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खरगे के विरोध में शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। तब तो इसे कांग्रेस के आंतिरक लोकतंत्र के रूप में पेश किया गया था। सवाल है कि क्या गांधी परिवार को थरूर का वह कदम बुरा लगा था? थरूर का संसदीय क्षेत्र केरल में है जहां एक और संसदीय क्षेत्र वायनाड से अभी प्रियंका गांधी पहली बार संसद पहुंची हैं। उनसे पहले राहुल गांधी ने वायनाड का प्रतिनिधित्व लोकसभा में किया था।

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