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महाकुंभ का पानी ब‍िक रहा बिसलेरी से कितना महंगा? मुनाफा जानकर उड़ जाएंगे होश, उठ गए हैं सवाल

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नई दिल्‍ली

कई ई-कॉमर्स कंपनियां जैसे ब्लिंकिट, बिगबास्‍केट और अमेजन महाकुंभ का जल ऑनलाइन बेच रही हैं। इस पर जोरदार मुनाफा वसूला जा रहा है। शील्ड-इंडिया के संस्थापक नमनबीर सिंह ने महाकुंभ के पवित्र जल की ऑनलाइन बिक्री पर गुस्‍सा जाहिर किया है। उन्होंने ब्लिंकिट की ओर से ‘महाकुंभ संगम गंगाजल’ को 69 रुपये में बेचने पर सवाल खड़े किए हैं। सिंह ने इसकी प्रामाणिकता और कीमत पर चिंता जताई है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं के व्यावसायीकरण पर भी बहस छेड़ दी है।

नमनबीर सिंह ने अपने लिंक्‍डइन पोस्ट में लिखा, ‘संगम जल या सिर्फ चतुर मार्केटिंग?’ उन्होंने ब्लिंकिट की ओर से बेचे जा रहे गंगाजल की असलियत पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि पानी असल में संगम से है या नहीं। सिंह ने लिखा- ‘मेरे पास यह साबित करने का कोई तरीका नहीं है कि यह असली संगम से आ रहा है या नहीं।’ उन्होंने बताया कि कैसे थोड़ा सा असली गंगाजल मिलाकर सामान्य पानी को पवित्र बताकर बेचा जाता है। उन्हें शक है कि संगम जल के साथ भी यही हो रहा है।

पूरे व्‍यापार का समझाया गण‍ित
सिंह ने कहा, ‘संगम जल लाने की लागत लगभग शून्य है क्योंकि कोई भी व्यक्ति इसे एक छोटी बोतल में ला सकता है।’ उन्होंने बताया कि अगर एक बोतल असली पानी को पूरे उत्पादन में मिला दिया जाए तो मुनाफा बहुत ज्‍यादा होता है। एक लीटर बिसलेरी की बोतल 20 रुपये की आती है। वहीं, ब्लिंकिट का संगम जल 100 मिलीलीटर के लिए 99 रुपये में मिलता है। सिंह ने अनुमान लगाया कि अगर 1 लाख श्रद्धालुओं को बेचा जाए तो ब्लिंकिट लगभग 1 करोड़ रुपये कमा सकती है। उन्होंने मजाक में कहा, ‘यह शुद्ध ’15 दिन में पैसे डबल स्कीम’ है।’

कौन क‍ितने में बेच रहा है संगम का गंगाजल?
इस विवाद के बावजूद कई बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां इस धंधे में कूद पड़ी हैं। ब्लिंकिट ‘महाकुंभ संगम गंगाजल’ 69 रुपये में दे रही है। प्रयागराज में महाकुंभ मेले में एक 100 वर्ग फीट का स्टोर भी खोला है। बिगबास्‍केट ने ‘स्वस्ति महाकुंभ पवित्र त्रिवेणी संगम जल’ लॉन्च किया है, जिसमें गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम से सीधे पानी लाने का वादा किया गया है। अमेजन पवित्र स्थल से ‘महाकुंभ – त्रिवेणी जल (100 मिली) + मिट्टी’ 121 रुपये में बेच रही है।

सिंह के पोस्ट ने आस्था के व्यावसायीकरण पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। कंपनियां तर्क देती हैं कि वे आध्यात्मिक अनुभवों को अधिक सुलभ बना रही हैं। लेकिन, कुछ लोग धार्मिक भावनाओं से लाभ कमाने की नैतिकता पर सवाल उठा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘Blinkit, Zepto, BigBasket और Amazon आपके घर तक पवित्र जल पहुंचा रहे हैं, लेकिन किस कीमत पर?’ उन्होंने निष्कर्ष निकाला, ‘अगर आप भारत में आस्था पर आधारित व्यवसाय बना सकते हैं तो आप अरबपति बन सकते हैं।’

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