नई दिल्ली
बेंगलुरु में पानी की बर्बादी लोगों को महंगी पड़ रही है। बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने उन लोगों पर लगाम कसनी शुरू कर दी है जो पानी की बर्बादी कर रहे हैं। BWSSB ने सिर्फ एक हफ्ते में 112 केस दर्ज किए हैं। इनसे 5.6 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है।
दरअसल, गर्मी आते ही बेंगलुरु में पीने के पानी की कमी हो जाती है। पिछले साल यहां पानी की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई थी। चूंकि बेंगलुरु में देश-दुनिया की कई बड़ी-बड़ी कंपनियों के ऑफिस हैं। साथ ही यहां कई स्टार्टअप भी हैं। ऐसे में बेंगलुरु में पानी की कमी से बड़ा संकट आ जाता है। इस बार ऐसा कोई संकट न आए, इस वजह से पानी की बर्बादी पर लगाम कसनी शुरू कर दी है।
यहां आए सबसे ज्यादा मामले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंगलुरु के साउथ जोन में पानी की बर्बादी के सबसे ज्यादा मामले आए। यहां 33 मामले दर्ज किए गए। वेस्ट और ईस्ट जोन में 28-28 मामले दर्ज हुए हैं। नॉर्थ जोन भी पीछे नहीं है। यहां 23 मामले देखे गए हैं। BWSSB के अधिकारी सिर्फ जुर्माना ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि समय पर वसूली भी कर रहे हैं ताकि पानी बचाने के नियमों का सख्ती से पालन हो।
100 किमी दूर से आता है पानी
BWSSB चेयरमैन डॉ राम प्रसाद मनोहर ने बताया कि पीने का पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह पानी लगभग 100 किलोमीटर दूर से बेंगलुरु लाया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और नियमों का पालन करें ताकि पूरे शहर में पानी की सही से सप्लाई हो सके।
बर्बादी रोकने के लिए उठाए कई कदम
पानी की बर्बादी रोकने के लिए BWSSB ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। गाड़ी धोना, बगीचा सींचना, स्विमिंग पूल भरना और निर्माण कार्य जैसे कामों में पीने के पानी का इस्तेमाल अब मना है। ऐसा करने वालों पर 5000 रुपये का जुर्माना लगेगा। बार-बार नियम तोड़ने पर हर दिन 500 रुपये अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।
बेंगलुरु की स्थिति खराब
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के की एक स्टडी में 80 वार्ड (जिनमें 110 गांव शामिल हैं) को पानी की कमी के लिहाज से बेहद संवेदनशील बताया गया है। ये इलाके ज्यादातर भूजल पर निर्भर हैं। पिछले साल जैसे हालात फिर से न बनें, इसके लिए BWSSB पानी के दूसरे स्रोतों की तलाश कर रहा है। यानी BWSSB पानी की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने में लगा हुआ है।
