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क्या श्रीलंका टीम जैसे हमले का इंतजार कर रहा है पाकिस्तान? चैंपियंस ट्रॉफी में ड्यूटी छोड़ भागे पुलिसवाले

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कराची

एक ओर सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार टीवी पर बैठकर खिलाड़ियों और विदेशी क्रिकेट फैंस की सुरक्षा पर ज्ञान दे रहे थे और भारत पर निशाना साध रहे थे तो दूसरी ओर 100 से अधिक पुलिस वाले अपनी ड्यूटी पर ही नहीं गए। न्यूजीलैंड और बांग्लादेश के बीच मैच में प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक से जुड़ा व्यक्ति न केवल सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान पर पहुंचने में कामयाब रहा, बल्कि भारतीय मूल के कीवी खिलाड़ी रचिन रविंद्र को जबरदस्त गले भी लगाता दिखा। मुस्तैद लापरवाह सुरक्षाकर्मी बच्चों की तरह आगे-पीछे दौड़ती भागती दिखे। उधर पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी पर आतंकी हमले का अलर्ट भी जारी किया गया, लेकिन सरकार को दिखावे से फुरसत ही नहीं है।

100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी से किया इनकार
किसी भी जगह-व्यक्ति विशेष की सुरक्षा में लगाई गई पुलिस अनुशासित होनी चाहिए, लेकिन पाकिस्तान में अलग कहानी है। बिना किसी इन्फॉर्मेशन के पुलिसकर्मियों का ड्यूटी पर नहीं आना न केवल सरकार की विफलता को दर्शाता है, बल्कि इससे इस बात का डर भी अधिक हो जाता है कि किसी भी बड़ी घटना की परिस्थिति में ऐसी लापरवाह पुलिस के बीच क्या कोई सुरक्षित भी है। हालांकि, पंजाब सरकार एक्शन में आई और ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से इनकार करने पर 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया।

ऐसी लापरवाह में सुरक्षा में कौन सुरक्षित?
बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी पुलिस बल के विभिन्न विभागों से जुड़े थे। इस घटना के पीछे लंबी ड्यूटी के कारण पुलिसकर्मियों का अधिक बोझ होना बताया जा रहा है। इस बात का अनुमान भी लगाया जा रहा है कि वे अपने लिए व्यवस्थाओं से भी नाराज हैं। पुलिस अधिकारी ने इस बारे में बताया- पुलिस अधिकारियों को गद्दाफी स्टेडियम लाहौर और निर्धारित होटलों के बीच यात्रा करने वाली टीमों के लिए सुरक्षा प्रदान करने का काम सौंपा गया था, लेकिन वे या तो अनुपस्थित रहे या अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से साफ इनकार कर दिया।

दावा लंबी ड्यूटी से परेशान पुलिसकर्मी
उन्होंने आगे बताया कि IGP पंजाब उस्मान अनवर ने मामले का संज्ञान लिया है और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा- अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सुरक्षा के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मियों ने अपनी सौंपी गई आधिकारिक ड्यूटी करने से इनकार क्यों किया, इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कई स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी लंबी ड्यूटी के कारण अधिक बोझ महसूस कर रहे थे।

2009 में श्रीलंका टीम पर हुआ था आतंक हमला
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी पर 2009 श्रीलंका टीम पर हुए हमले जैसा कोई आतंकी हमला न हो जाए इसके लिए अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होनी चाहिए। पुलिस को कहीं अधिक अलर्ट होनी चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो आर्मी लगानी चाहिए, लेकिन संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार बातों से पेट भरने में व्यस्त हैं। मैच के दौरान जहां टीवी पर खाली स्टेडियम साफ देखे जा सकते हैं तो दूसरी ओर इसके उलट दावा करते हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने तो बेबाक अंदाज में कह दिया था कि मैच इतने बड़े और स्टेडियम खाली हैं।

तरार ने आतंकी हमले के अलर्ट को भी खारिज किया था, लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा की बात नहीं की। वह लीपा पोती में लगे हुए हैं। उन्हें समझना चाहिए कि यह समय बातों का नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने का है। अगर श्रीलंका टीम जैसा कोई हमला हुआ तो अगले 100 सालों तक कोई टीम पाकिस्तान जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकेगी।

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