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Wednesday, June 3, 2026
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कांग्रेस से अनबन क्या अब भी… दिल्ली में वापसी मुश्किल वाले जवाब से शशि थरूर ने खड़े किए कई सवाल

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नई दिल्ली

केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव है। इससे ठीक पहले जिस तरह से पार्टी के दिग्गज नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर सवाल खड़े कर रहे हैं, उससे कांग्रेस नेतृत्व भी सकते में आ गया। आनन-फानन में शशि थरूर से अंदरखाने बात हुई और स्थिति संभाली गई। ऐसा माना जा रहा कि कांग्रेस आलाकमान डैमेज कंट्रोल में सफल रहा। शुक्रवार को केरल कांग्रेस नेताओं को बैठक के लिए बुलाया गया है। इसमें शशि थरूर ने भी आने का दावा किया है। भले ही थरूर मान गए हों लेकिन उन्होंने पार्टी संगठन को लेकर कई दावे किए हैं। एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दिल्ली में वापसी मुश्किल है क्योंकि यहां एक्शन नहीं है। यहां संगठन पर काम करना जरूरी है।

संगठन की मजबूती पर थरूर का जोर
शशि थरूर ने कहा कि जहां हमारा संगठन मजबूत है, जैसे साउथ इंडिया में हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे। केरल में हमने अच्छा प्रदर्शन किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार कांग्रेस की हार की उन्होंने कई वजहें गिनाई। उन्होंने कहा कि हर राज्य में राजनीतिक इतिहास अलग है, राजनीतिक प्रकृति अलग है। बीजेपी जो नॉर्थ इंडिया में कर रही दक्षिण भारत में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिल रही। कांग्रेस कहीं भी गायब नहीं है। हर राज्य में हमारी उपस्थिति है।

दिल्ली में हार की बताई असल वजह
शशि थरूर ने दिल्ली को लेकर कहा कि यहां हम एबसेंट नहीं हैं। हमें 70 सीटों पर उम्मीदवार मिले यानी हम मौजूद हैं। हम तीन बार चुनाव हार चुके हैं। अगर हम किसी राज्य में तीन बार चुनाव हारते हैं तो इसका मतलब है वहां वापस आना आसान नहीं है। अगर आप तीन बार हार जाते हैं तो लोग दूसरे ऑप्शन देख लेते हैं। ये एक बड़ा चैलेंज है। ऐसे राज्य हैं हमारे देश में जहां गठबंधन के साथ ही आगे बढ़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश की बात करें तो हमने एक समय अकेले सरकार चलाई लेकिन अब गठबंधन में ही आगे बढ़ सकते हैं।

लोकसभा में प्रदर्शन से कांग्रेस के प्रति जगी उम्मीद
शशि थरूर ने बिहार और बंगाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में हमें अपनी रणनीतिक प्लानिंग करनी होगी। कांग्रेस सांसद ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से लोगों की हमसे उम्मीदें बढ़ गई। हमारी तरफ से 100 लोग जीते। बाद में एक निर्दलीय कांग्रेस में आए तो हमारे 101 सांसद हो गए। हमारी पूरे देश में उपस्थिति नजर आई। हालांकि, विधानसभा चुनाव में लोगों की सोच बदल जाती है। असेंबली में वो क्या देखना चाहते हैं? दिल्ली में लोगों की सोच क्या है ये हमें समझना होगा।

सरकार के हर फैसले का विरोध करना ही सही नहीं- थरूर
थरूर ने केंद्र सरकार के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम विपक्ष में हैं तो इसका मतलब ये नहीं हमें सरकार के हर फैसले का विरोध ही करना है। हम विकास के बारे में सोचें, लोगों के हित के बारे में सोचें। यही मेरी सोच है। जैसे फॉरेन पॉलिसी की बात करें तो मेरा मानना है कि न कांग्रेस की विदेश नीति होनी चाहिए, न बीजेपी की विदेश नीति होनी चाहिए। सारे क्षेत्र में ऐसी सोच कर सकें तो काफी अच्छा रहेगा।

चार बार से लोकसभा सांसद हैं थरूर
इससे पहले थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व से नाराजगी की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि पॉडकास्ट में राजनीतिक विवाद जैसा कुछ खास नहीं था। थरूर साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए। उसके बाद से लगातार चार बार वो केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से लोकसभा सांसद हैं।

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