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राजनीतिक दलों के साथ करें नियमित बैठकें… इलेक्शन कमीशन का चुनाव मशीनरी को निर्देश, जानें और क्या-क्या कहा

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नई दिल्ली

भारतीय चुनाव आयोग ने देश के तमाम सीईओ, डीईओ और ईआरओ के साथ दो दिवसीय सम्मेलन में कई निर्देश दिए। चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपने-अपने राज्यों के तमाम राजनीतिक दलों और अन्य स्टेक होल्डर के साथ नियमित रूप से बैठकें करके उनकी समस्याओं को जानें। फिर इन समस्याओं का निवारण करने की हर संभव कोशिश करें। इसके लिए चुनावी मशीनरी को निर्देश दिए गए हैं कि वह 31 मार्च तक सभी राजनीतिक दलों समेत 28 स्टेक होल्डर के साथ मीटिंग कर उनकी समस्याओं को जानकार उनका निवारण करें। इसके बाद इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को भी सौंपे।

ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने के बाद उनकी यह पहली ऑल इंडिया सीईओ मीटिंग है। चार और पांच मार्च को दिल्ली में आयोजित इस मीटिंग में 100 से अधिक अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है। जब पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की तरफ से आयोग पर लगातार हमला करते हुए विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के पास एक नंबर के वोटर कार्ड होने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर आयोग ने 23 फरवरी को सफाई देते हुए यह माना था कि कुछ राज्यों के कुछ वोटरों के वोटर कार्ड नंबर यानी एपिक नंबर एक समान हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इनमें से कोई वोटर फर्जी है या फिर वह अपने तय पोलिंग स्टेशन से कहीं और वोट डाल सकता है।

आयोग ने साफ किया था कि एक समान वोटर कार्ड नंबर होने का मतलब कोई फर्जीवाड़ा से नहीं है। जबकि तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि देश में कोई भी दो वोटर कार्ड के नंबर एक समान नहीं हो सकते। दो दिवसीय ऑल इंडिया सीईओ मीटिंग में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा अधिकारियों से कहा कि वह अपने तमाम कार्यों में अधिक से अधिक पारदर्शिता लाने के साथ ही अपने तमाम दायित्यों को लगन और मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुसार पूरा करें।उन्होंने अधिकारियों को राजनीतिक दलों के प्रति सुलभ और उत्तरदायी होने का निर्देश दिया।

कुमार ने कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा मौजूदा वैधानिक ढांचे के भीतर किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए वैधानिक स्तर पर सभी दलों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का उसी तरह अक्षर: पालन करना चाहिए। जैसा की कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार ने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उन्हें देखना चाहिए कि 18 साल से ऊपर के सभी नागरिक संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हों। उन्होंने यह भी कहा कि बूथ स्तर के सभी अधिकारियों को मतदाताओं के साथ विनम्र रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाए और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी चुनावी कर्मचारी या अधिकारी झूठे दावों से भयभीत न हो।

वोटिंग बढ़ाने के लिए सुविधाओं पर जोर
दो दिवसीय सम्मेलन में आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि चुनावों में अधिक से अधिक वोटर वोटिंग कर सकें। इसके लिए अधिकारियों को प्रत्येक मतदान केंद्र में 800 से 1200 वोटरों को रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया गया कि यह प्रत्येक मतदाता के निवास से 2 किलोमीटर की दूरी के भीतर हो। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान में आसानी के लिए उचित सुविधाओं वाले मतदान केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। शहरी क्षेत्रों में मतदान बढ़ाने के लिए हाई राइज बिल्डिंगों के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में भी मतदान केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।

क्या है मकसद?
संवैधानिक ढांचे और कानूनों की व्यापक मैपिंग के बाद आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, मतदान एजेंटों समेत पूरी चुनावी प्रक्रिया में 28 स्टेक होल्डरों की पहचान की है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रत्येक 28 पहचाने गए हितधारकों की क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। सम्मेलन में पहली बार प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से एक जिला निर्वाचन अधिकारी और एक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी भाग ले रहे हैं।

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