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Wednesday, March 18, 2026
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‘कमजोर होगा राजनीतिक प्रतिनिधित्व’, परिसीमन के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में जुटे स्टालिन, कई नेताओं को लिखा पत्र

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नई दिल्ली

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने दक्षिणी और पूर्वी भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत अहम नेताओं को परिसीमन के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश शुरू कर दी है। सीएम स्टालिन ने अलग-अलग राज्यों के नेताओं को लिखे पत्र में कहा है कि अगर परिसीमन की प्रक्रिया अगली जनगणना के अनुसार होती है, तो उन राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के तौर सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि उन्होंने अपनी जनसंख्या को सफलता पूर्व नियंत्रित किया है।

सीएम स्टालिन ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार की परिसीमन योजना को संघवाद पर एक बुनियादी हमला बताया है। स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा कि भारत के लोकतंत्र का सार उसके संघीय नेचर पर आधारित हैं, जो कि एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें प्रत्येक राज्य की उचित महत्व मिलता है। उन्होंने लिखा ने कहा कि परिसीमन से इस संतुलन को एक गंभीर खतरा है, जो कि हमारे देश के भविष्य को आकार देने में हमारे जैसे राज्यों के प्रभाव को स्थायी रूप से कम कर सकता है।

स्टालिन ने इन राज्यों के नेताओं को भेजा था प्रपोजल
अपने पत्र में स्टालिन ने केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब के सीएम को विरोध के लिए एक संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) में शामिल होने का प्रपोजल दिया है। उन्होंने लिखा कि हमें एक साथ मिलकर इस चुनौती के संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक आयामों की जांच करनी चाहिए। केवल एक सहयोगी विश्लेषण और एकीकृत वकालत के माध्यम से ही हम एक ऐसी परिसीमन प्रक्रिया को सुरक्षित करने की उम्मीद कर सकते हैं, जो हमारे वर्तमान प्रतिनिधित्व के स्तर से समझौता किए बिना राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका का सम्मान करती है।

स्टालिन ने विपक्षी दलों से साथ की थी अहम बैठक
स्टालिन ने 5 मार्च को इस मुद्दे पर अहम बैठक की थी, जिसमें डीएमके अलावा AIADMK, कांग्रेस और वाम दलों ने मतभेदों से इतर उठकर परिसीमन की व्यवस्था को, तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सीधा हमला करा दिया। हालांकि, तमिलनाडु बीजेपी ने चिंताओं को कल्पनिक बताया और स्टालिन द्वारा बुलाई गई बैठक का बहिष्कार किया गया।

स्टालिन के विरोध की मूल वजह क्या है। इसको समझें तो उनका मानना है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों ने परिवार नियोजन पहलों को सफलतापूर्वक लागू किया है, लेकिन अगर 2026 में जनगणना के बाद, परिसीमन होता है तो इसके चलते जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों के पक्ष में संसदीय सीटें खो देंगे। उन्होंने कहा कि 39 लोकसभा सीटों वाले तमिलनाडु की हिस्सेदारी 8 सीटों तक कम हो सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार जैसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा हो सकता है।

क्या बोले CM स्टालिन?
सीएम एम के स्टालिन ने अपने पत्र में चेतावनी दी कि अब सवाल यह नहीं है कि परिसीमन होगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि कब होगा और क्या यह उन राज्यों के योगदान का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया है, या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले संसदीय निर्णयों ने 1976 में 42वें संशोधन के माध्यम से परिसीमन को रोक दिया था।

इसके अलावा जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता को मान्यता देते हुए 2004 में 84वें संशोधन के माध्यम से 2026 के बाद पहली जनगणना के बाद तक इसे रोक दिया गया था। 2021 की जनगणना में देरी के बीच परिसीमन होने के चलते अनुमान है कि यह 2031 से बहुत पहले हो सकता है। इस तेजी से हमें अपने हितों की रक्षा करने के लिए बहुत कम समय मिलता है।

‘जनसंख्या नियंत्रण का हमें दंड न मिले’
स्टालिन ने यह स्वीकार किया कि हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका विरोध यह है कि केंद्र सरकार अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों को पूरा करने वाले राज्यों के खिलाफ इसे एक हथियार के तौर पर पेश कर रही है, जिससे प्रगति को नुकसान पहुंचता है। किसी भी परिदृश्य में अगर आवंटन पूरी तरह से जनसंख्या आधारित है, तो जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने लिखा कि हमें जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए इस तरह दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
सीएम स्टालिन ने बताया कैसे हो रहा नुकसान

मामले की गंभीरता के बावजूद स्टालिन ने केंद्र सरकार पर स्पष्टता या ठोस प्रतिबद्धता दिखाने के विफल रहने का आरोप लगाया है। 5 मार्च की सर्वदलीय बैठक में स्टालिन ने चेतावनी दी थी कि यदि संसदीय क्षेत्रों की कुल संख्या 543 बनी रहती है तो तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व 39 से घटकर 31 रह जाएगा। यहां तक ​​कि ऐसी स्थिति में भी जहां सांसदों की संख्या बढ़कर 848 हो जाती है, तमिलनाडु को केवल 10 अतिरिक्त सीटें ही मिलेंगी, जो आनुपातिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए आवश्यक 22 सीटों से बहुत कम है।

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