पटना
बिहार में राजनीतिक दल विकास की चाहे जितनी बातें कर लें, लेकिन जाति से वे अलग नहीं जा सकते। नब्बे के दशक से ही यह परंपरा चली आ रही है। पीएम रहते विश्वनाथ प्रताप सिंह ने आरक्षण पर बीपी मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया था। देश भर में इसके समर्थन और विरोध में सामाजिक विद्वेष चरम पर पहुंच गया। अगड़ों-पिछड़ों में खून-खराबा मंच गया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के पैदा हुई स्थिति पर काबू पाने के लिए बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए रथयात्रा निकाली। इसे राजनीतिक हलकों में कमंडल कहा गया।
लालू की राह आसान कर दी
बिहार में लालू प्रसाद यादव आरक्षण समर्थक बन कर उभरे। सत्ता उनके हाथ आ गई। तब वे पिछड़े समाज के मसीहा कहे गए। आरजेडी ने तब से चुनाव जीतने के अपने आजमाएं इस फार्मूले को अब तक नहीं छोड़ा है। इस बार भी विधानसभा चुनाव में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप में मंडल और कमंडल के बीच जंग की आरजेडी ने रूपरेखा बना ली है। आरजेडी ने फिर आरक्षण का राग छेड़ दिया है। इस बीच बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी पहुंच गए हैं। धीरेंद्र शास्त्री छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं के घोष वाक्य से भाजपा को अघोषित तौर पर मदद पहुंचा रहे हैं तो मोहन भागवत युवाओं को आगे बढ़ने का मंत्र दे रहे हैं।
आरक्षण को ले धरना दिया
तेजस्वी यादव विधानसभा चुनाव में परचम लहराने का कोई प्रयास छोड़ना नहीं चाहते। लालू यादव उनके राजनीतिक गुरु बने हुए हैं। जातीय गोलबंदी उनका पुराना खेल है। जातीय गोलबंदी से ही जुड़ा है आरक्षण का मामला। वर्ष 2015 के असेंबली चुनाव में आरक्षण का जिन्न जगा कर लालू ने कमाल कर दिया था। भाजपा चित्त हो गई। बिहार में महागठबंधन की सरकार बन गई थी। लगता है कि लालू ने बेटे तेजस्वी को फिर से आरक्षण का जिन्न जगाने का मंत्र दे दिया है। तेजस्वी ने पटना में आरजेडी दफ्तर के सामने 65 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर धरना दिया।
BJP को आरक्षण चोर कहा
तेजस्वी यादव धरने के वक्त भाजपा पर खूब बरसे। भाजपा को उन्होंने आरक्षण चोर तक कह दिया। लालू ने 2015 में कहा था कि भाजपा सत्ता में आई तो आरक्षण खत्म कर देगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी विपक्ष का यही नैरेटिव था। तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन सरकार के दौरान आरक्षण सीमा बढ़ा कर 65% की गई। मौजूदा एनडीए सरकार ने इसे लागू नहीं होने दिया। इससे पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 16% आरक्षण का नुकसान हुआ। शिक्षक नियुक्ति में भी आरक्षण लागू नहीं होने से हजारों उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं। भाजपा आरक्षण चोर है।
