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बांग्लादेशियों का जाली दस्तावेज से बर्थ सर्टिफिकेट हासिल करना गंभीर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई चिंता

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मुंबई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि जाली दस्तावेज से बांग्लादेशियों का बर्थ सर्टिफिकेट हासिल करना बेहद गंभीर है। क्योंकि यह सर्टिफिकेट मिलने पर बांग्लादेशी देश की विभिन्न सरकारी सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसमें इलेक्शन कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) भी शामिल है। यह सब फर्जी दस्तावेज से हासिल किया जा रहा है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने मामले में आरोपी एक वकील और पत्रकार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।

क्या है मामला?
दोनों के खिलाफ नासिक जिले के छावनी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज है। केस में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए दोनों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दायर की थी। जस्टिस राजेश पाटिल के सामने आरोपियों की बेल अर्जी पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य सरकारी वकील हितेन वेणेगांवकर ने कहा कि केस में आरोपियों की चल रही एक बड़ी योजना का पर्दाफाश किया गया है। जो एक खास तरीके से चल रही थी।

‘नागरिकता हासिल करने हो रहाअवैध दस्तावेज का इस्तेमाल’
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर बांग्लादेशियों को अवैध दस्तावेज दिए जा रहे हैं। इन्हें वे देश की नागरिकता के लिए आवेदन करने के खातिर करते हैं और चुनाव प्रक्रिया में शामिल होते हैं। इसलिए केस की जांच के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। इस तरह सरकारी वकील ने आरोपियों की बेल अर्जी का विरोध किया। मामले को लेकर तहसीलदार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वहीं एक आरोपी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। उन्होंने कोई जाली दस्तावेज नहीं बनाया है। जबकि दूसरे आरोपी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अखबार में सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट से जुड़ी नोटिस को प्रकाशित किया था। पत्रकार को नोटिस के कन्टेन्ट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

कैसे किया था फर्जीवाड़ा
इन दलीलों पर जस्टिस पाटिल ने कहा कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि नायब तहसीलदार के एजेंट साथ मिलकर आरोपियों द्वारा फर्जीवाड़ा किया गया है। मामले में स्थानीय महानगर पालिका की मुहर का इस्तेमाल हुआ है। केस के जांच अधिकारी की की रिपोर्ट मुताबिक, 2800 नोटिस अखबार आपत्तियां मांगने के लिए प्रकाशित हुई है। यह कोई सरल केस नहीं है। केस में 12 कथित बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ आरोपी फरार है। यह बेहद गंभीर मामला है। केस में पूछताछ के लिए आरोपियों को हिरासत में लेना जरूरी है। गौरतलब है कि जब लंबे अंतराल के बाद बर्थ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए अखबार में नोटिस देना जरूरी होता है।

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