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CM योगी का होली का भी राजनीतिकरन, महाकुंभ स्नान के जरिए अखिलेश यादव को घेर लिया

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गोरखपुर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में होली 2025 एक अलग स्थान बनाता दिख रहा है। इस मौके पर जबरदस्त राजनीतिक बयानबाजी होती दिखी है। भले ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाले हों, उससे पहले 2026 की होली आनी शेष है। लेकिन, 2025 की होली कई मायनों में खास मानी जा रही है। दरअसल, रमजान का महीना चल रहा है। रमजान के माह में जुम्मे की नमाज का विशेष महत्व होता है। ऐसे में होली के दिन जुमे की नमाज के आयोजन को लेकर पिछले दिनों प्रदेश से लेकर देश स्तर तक राजनीतिक गरमाती रही है। इसको लेकर तरह-तरह के बयान देखने और सुनने को मिले। इन तमाम बयानबाजियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ तौर पर शासन और प्रशासन को निर्देश दिए कि होली और नमाज दोनों का आयोजन शांतिपूर्ण माहौल में होगा।

होली और नमाज को लेकर प्रदेश स्तर पर बड़ी तैयारी की गई। होली के रंगों से विवाद की स्थिति न बने, इसलिए प्रदेश में मस्जिदों को ढका गया। होली का आयोजन भव्य तरीके से हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं गोरखपुर में होली के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। साथ ही, रंगों के पर्व के दौरान वे विपक्ष को हिंदुत्व के रंग में रंगने की कोशिश भी करते दिखे। उन्होंने भगवान नरसिंह की शोभा यात्रा में शामिल होने के बाद आयोजित जनसभा में विपक्ष के नेता के महाकुंभ स्नान का जिक्र कर दिया। इसको लेकर चर्चा का बाजार गरमा गया है।

महाकुंभ की सफलता भुना रहे योगी
योगी आदित्यनाथ सरकार महाकुंभ के सफल आयोजन को बड़े स्तर पर भुनाती दिख रही है। सरकार की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में संगम का पवित्र जल भेज कर सनातनियों को इससे जोड़ने की कोशिश की गई। सनातनी समाज भी इस पर खुशी जताता दिखा। प्रदेश में जातीय भेद से इतर सनातन को एक धुरी पर लाने का प्रयास महाकुंभ के जरिए सफल होता दिखा है। अब होली के आयोजन के जरिए एकता संदेश देते सीएम योगी आदित्यनाथ दिख रहे हैं।

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए राजनीति के जरिए ऐसा राजनीतिक चक्रव्यूह तैयार किया, जिसमें भाजपा फंस गई। भारतीय जनता पार्टी इस पॉलिटिक्स का काट नहीं खोज पाई, नतीजा लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के रूप में सामने आया।

बदली रणनीति का दिख रहा असर
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में अपनी राजनीतिक लाइन ही बदल दी। सीएम योगी आदित्यनाथ समाज को जातीय बंधन से निकाल कर धार्मिक एकजुटता की ओर ले जाने की कोशिश करते दिखे। इसका परिणाम यूपी में पिछले दिनों हुए उपचुनावों में दिखा है। ‘बंटोगे तो कटोगे’ जैसे नारे के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सांप्रदायिक रूप से समाज को एकजुट करने प्रयास किया, उसमें उन्हें सफलता मिली। महाकुंभ का सफल आयोजन उन्हें सनातन को एक धुरी पर लाने में सफलता दिलाता दिखा है।

इसी तरह होली को भव्य तरीके से मनाए जाने की बात कर वे अपने साथ आए लोगों को साधते दिख रहे हैं। सीएम योगी सीधे-सीधे विपक्ष की तुष्टिकरण वाली राजनीति पर प्रहार करते दिख रहे हैं। गोरखपुर में आयोजित आरएसएस की शोभा यात्रा के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सनातन की ताकत का जिक्र किया।

अखिलेश पर निशाना
सीएम योगी महाकुंभ का जिक्र बड़े मंचों पर करते दिख रहे हैं। इसके जरिए सनातन की एकता की बात करते हैं। होली के मौके पर भी उन्होंने कहा कि सनातन का वैभव और ताकत दोनों महाकुंभ में दिखाई दिया। यही कारण रहा कि जो लोग सनातन की बुराई करते नहीं थकते थे। हर बात पर सनातन को नीचा दिखाने का प्रयास करते थे। वे लोग भी महाकुंभ मेला में पहुंचकर पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान किया। अपने पाप धोए। दरअसल, सीएम योगी का निशाना अखिलेश यादव पर होने का दावा किया जा रहा है।

प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव अभी विपक्ष का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। वे भी होली मनाते दिख रहे हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सीधे-सीधे उन पर होली के दिन ही हमला करते दिख रहे हैं। महाकुंभ मेला के दौरान विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे के रूप में अखिलेश यादव ही पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान करते दिखाई दिए थे। ऐसे में सीएम योगी के बयान को उनसे जोड़ा जा रहा है।

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