नई दिल्ली
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात ने कहा है कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन का गठन लोकसभा चुनावों के लिए किया गया था न कि राज्य चुनावों के लिए। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों के एक व्यापक मंच बनाने की बात कही है। करात ने यह भी कहा कि गठबंधन को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए ताकि यह केवल चुनावी राजनीति से प्रभावित न हो। लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन बनाया था।
प्रकाश करात ने धर्मनिरपेक्ष मंच पर दिया जोर
सीपीएम के अंतरिम समन्वयक करात ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि घटक दलों के राज्यों में अपने-अपने समीकरण हैं। करात ने कहा कि यह सच है कि ‘इंडिया’ गठबंधन के गठन और सभी में नहीं तो कुछ राज्यों में इसके घटकों के बीच सहयोग के कारण निश्चित रूप से बीजेपी को लोकसभा में अपना बहुमत खोना पड़ा।
विपक्ष को महाराष्ट्र में लगा तगड़ा झटका
प्रकाश करात ने कहा कि इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए और मुझे लगता है कि विपक्ष के लिए सबसे बड़ा झटका महाराष्ट्र में लगा है, जहां महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। बीजेपी गठबंधन अल्पमत में आ गया, लेकिन विधानसभा चुनाव में इसका उल्टा हुआ। वरिष्ठ माकपा नेता ने यह भी कहा कि वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं, क्योंकि झारखंड में विपक्षी गठबंधन ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।
करात बोले- राज्यों में स्थिति अलग-अलग
करात ने कहा कि हम अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं, क्योंकि राज्यों में स्थिति काफी हद तक अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, झारखंड में गठबंधन जिसमें अधिकतर दल ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक हैं – बीजेपी को हराने में सफल रहा। इन विधानसभा चुनावों के बाद आम धारणा यह है कि बीजेपी ने इन चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। लेकिन मेरा मानना है कि इसे सीधे तौर पर ‘इंडिया’ गठबंधन के भाग्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि इसका गठन मुख्य रूप से लोकसभा चुनावों का सामना करने के लिए ही स्थापित किया गया था।
इंडिया गठबंधन के भविष्य पर क्या बोले सीपीएम नेता
वामपंथी नेता ने कहा कि इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई है कि लोकसभा के बाद गठबंधन किस तरह आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एक व्यापक विपक्षी मंच या धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों के बीच एकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि लोकसभा के बाद के चरण में आगे कैसे बढ़ना है, इस पर कोई चर्चा या विचार नहीं किया गया है।
बिहार-तमिलनाडु का जिक्र कर गठबंधन पर कही ये बात
करात ने कहा कि एक व्यापक विपक्षी मंच या धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों की एकता की आवश्यकता है। इस पर इंडिया गठबंधन के सभी घटकों की ओर से विचार किया जाना चाहिए। बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों में गठबंधन पहले से ही हो चुका है। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल में सीपीएम के तृणमूल कांग्रेस के साथ आने की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप)और कांग्रेस के हाथ मिलाने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती थी।
