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क्या बढ़ेंगी मंत्री माणिकराव कोकाटे की मुश्किलें? नासिक सेशन कोर्ट के फैसले पर MVA नेताओं को एतराज

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मुंबई:

महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार में मंत्री धनंजय मुंडे का इस्तीफा होने के बाद विवादों में घिरे दूसरे मंत्री माणिकराव कोकाटे फिर सुर्खियों में हैं। इसकी वजह है कि नासिक सेशन कोर्ट का फैसला। नासिक सेशन कोर्ट ने जिला अदालत के उस फैसले पर स्टे लगा दिया है, जिसमें उन्हें 2 साल के जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जिला कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी की तरह की कोकाटे की विधायकी संकट में आ गई थी, क्योंकिजन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत, अगर किसी नेता को दो साल या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी विधायकी रद्द हो जाती है और साथ ही वह 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। कोकाटे अकोला जिले के संरक्षक मंत्री भी हैं।

फैसले की दलील पर भड़का विपक्ष
ताजा विवाद नासिक सेशन कोर्ट के फैसले को लेकर खड़ा हुआ। जिस पर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के नेताओं के बयान सामने आए हैं। नासिक सेशन कोर्ट ने कोकाटे को राहत देते हुए कहा है कि अगर कोकाटे की 2 साल जेल की सजा को बरकरार रखा जाता है तो उनकी विधायकी रद्द हो जाएगी और फिर से चुनाव कराने होंगे। इससे सरकार का पैसा खर्च होगा। जो वास्तव में जनता का है। कोर्ट ने कहा कि अगर बाद में कोकाटे की अपील सफल होती है, तो भी उनकी विधायक और मंत्री पद की बहाली संभव नहीं होगी, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान होगा। फैसले में ये टिप्पणियों करते हुए नासिक कोर्ट ने काेकाटे की सजा पर स्टे लगा दिया है। इस वजह से उन्हें बड़ी राहत मिल गई है। मंत्री कोकाटे पर आरोप है कि उन्होंने साल 1995 में फर्जी कागजात की मदद से सरकारी फ्लैट हासिल किए थे। इसी मामले में उन्हें जिला कोर्ट ने सजा सुनाई है।

वडेट्टीवार-रोहित पवार का डबल अटैक
नासिक सेशन कोर्ट की चुनाव खर्चे की दलील विपक्ष को रास नहीं आ रही है। विधानसभा में कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार का कहा है किकोर्ट की यह दलील हस्यापद है। किसी ने भी अपराध किया है तो उसे सजा जरूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह कहना है कि सजा सुनाने से चुनावी खर्च बढ़ेंगे, इसलिए कोकाटे को स्टे दिया गया है. यह हास्यास्पद है। कोर्ट यदि इस तरह की दलील देगा तो लोग न्याय के लिए किसके पास जाएंगे, कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर कोई शख्स किसी हत्या कर देता है तो इस मामले में भी कोर्ट इसी तरह का कोई तर्क देगा क्या? शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी से विधायक रोहित पवार ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। रोहित पवार ने कहा कि नासिक सेशन कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। पवार ने कहा कि चुनावी खर्च देखने का काम अदालत का नहीं है। पवार ने कहा कि मैं हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपील करता हूं कि वे इस मामले का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करें।

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