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तमिलनाडु में  गठबंधन की अटकलों के बीच अमित शाह से मिले AIADMK नेता

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नई दिल्ली:

तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर हो सकता है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। अटकलों के बीच पलानीस्वामी मंगलवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के घर पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात के बाद पलानीस्वामी एनडीए में वापस आ सकते हैं।

2023 में दोनों के बीच टूटा था गठबंधन
सितंबर 2023 में AIADMK ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। AIADMK के नेता बीजेपी की तमिलनाडु में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और द्रविड़ आइकन पेरियार के बारे में बीजेपी नेताओं की विवादास्पद टिप्पणियों से परेशान थे। 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए, AIADMK ने अकेले जाने का फैसला किया। वे बीजेपी के प्रभाव के बिना अपनी राह बनाना चाहते थे। लेकिन यह पहली बार नहीं था जब उनका गठबंधन टूटा था।

कई हफ्तों से चल रही है बात
कहा जा रहा है कि बीजेपी और AIADMK के बीच कई हफ्तों से बातचीत चल रही थी। पलानीस्वामी के एक करीबी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी सेकंड फिडल बजाने के लिए भी तैयार है। इसका मतलब है कि वे बीजेपी के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, भले ही उन्हें मुख्य भूमिका न मिले। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी हमारी चिंताओं को सुनते हैं और सहमत होती हैं, तो AIADMK-बीजेपी गठबंधन संभव है।

2016 में पहली बार साथ आए थे दोनों दल
AIADMK ने पहली बार 2016 में जे जयललिता के निधन के बाद बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। AIADMK ने डीएमके-कांग्रेस के बढ़ते मोर्चे का मुकाबला करने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाया था। 2019 लोकसभा चुनाव में AIADMK ने 22 और बीजेपी ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन गठबंधन को केवल 1 सीट पर जीत मिली, वहीं डीएमके-कांग्रेस गठबंधन ने 38 सीटें जीतीं।

2021 में साथ मिलकर लड़ा था विधानसभा चुनाव
इसके बाद भी दोनों पार्टियां साथ बनी रहीं और 2021 में मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा। AIADMK को 66 और बीजेपी को 4 सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता डीएमके के हाथ में चली गई, जिसने 159 सीटें जीतीं। इस चुनाव में बीजेपी को पहली बार तमिलनाडु में विधानसभा सीटें मिलीं, लेकिन गठबंधन की हार ने AIADMK को बीजेपी के साथ संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। धीरे-धीरे पलानीस्वामी ने बीजेपी से दूरी बना ली थी।

सितंबर 2023 में AIADMK ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया और एनडीए से बाहर निकल गई। इसके पीछे मुख्य कारण तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नामलाई के विवादास्पद बयान थे। अन्नामलाई ने AIADMK के संस्थापक अन्नादुराई और जयललिता पर टिप्पणियां कीं, जिन्हें AIADMK ने अपमानजनक माना। साथ ही, AIADMK को लगता था कि बीजेपी उसकी कीमत पर राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।

गठबंधन टूटने के बाद AIADMK और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। AIADMK ने DMDK और SDPI के साथ गठबंधन किया, लेकिन कोई सीट नहीं जीती। उसकी वोट हिस्सेदारी 20.46% रही। बीजेपी ने PMK और TMC के साथ गठबंधन किया, जिसकी वोट हिस्सेदारी 18.28% थी, लेकिन वह भी कोई सीट नहीं जीत सकी।

तमिलनाडु की राजनीति पर कितना होगा असर?
पलानीस्वामी की अमित शाह से मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के गठबंधन की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। अगर दोनों पार्टियां फिर साथ आती हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 2024 में AIADMK की वोट हिस्सेदारी 20.46% और बीजेपी गठबंधन की 18.28% थी। अगर ये दोनों एकजुट होते हैं, तो उनकी संयुक्त वोट हिस्सेदारी 35-40% तक पहुंच सकती है, जो DMK (26.93% वोट, 2024) को कड़ी चुनौती दे सकती है। वहीं 2021 में गठबंधन ने 33.29% वोट हासिल किए थे, जो बताता है कि एकजुट होने पर वे प्रभावी हो सकते हैं।

इसके अलावा AIADMK का पश्चिमी तमिलनाडु (कोयंबटूर, सलेम) और दक्षिणी जिलों में मजबूत आधार है, जबकि बीजेपी को कन्याकुमारी और कोयंबटूर जैसे क्षेत्रों में समर्थन मिलता है। यह गठबंधन क्षेत्रीय संतुलन बना सकता है। अगर AIADMK-बीजेपी साथ आती हैं तो डीएमके और कांग्रेस के ध्रुवीकरण को चोट लगेगी। खासकर अल्पसंख्यक वोटों (मुस्लिम और ईसाई) पर DMK की पकड़ कमजोर हो सकती है, अगर बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दों को जोर-शोर से उठाती है।

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