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संभल: शाही जामा मस्जिद सदर जफर अली की जेल में ही मनेगी ईद, जमानत याचिका खारिज

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संभल:

उत्तर प्रदेश के संभल में बीते साल 24 नंवबर को हिंसा के मामले में एसआईटी पुछताछ के बाद पुलिस के शिकंजे बुरे फंसे शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अब मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख लगाई गई है। ऐसे में मस्जिद के सदर जफर अली की ईद इस बार जेल में मनेगी।

दरअसल, संभल हिंसा के मामले में 23 मार्च को पुलिस ने शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को पुछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद 24 मार्च को चंदौसी स्थित जिला कोर्ट के सिविल जज सीनियर डिवीजन एसीजेएम आदित्य सिंह ने मस्जिद के सदर जफर अली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

अपर जिला शासकीय एडवोकेट हरिओम प्रकाश सैनी ने संभल की शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली की जमानत याचिका पर बहस की थी। एडीजी द्वितीय कोर्ट के जज निर्भय नारायण राय ने सीडी जमा करने के लिए 27 मार्च की तारीख नियत की थी। इसके बाद गुरुवार को न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख 2 अप्रैल लगा दी है।

क्या बोले शासकीय अधिवक्ता?
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश सैनी ने कहा कि जफर अली के अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय से मांग की गई थी कि वे जामा मस्जिद के सदर और वकील भी हैं। उनकी वकालत को देखते हुए अंतरिम बेल दे देनी चाहिए। कोर्ट में कहा गया कि जब तक केस की डायरी नहीं आ जाती तब तक उन्हें अंतरिम जमानत देकर रिहा किया जाना चाहिए।

अपर शासकीय अधिवक्ता ने आगे कहा कि इस पर कोर्ट के समक्ष दलील दी गई कि जफर अली पर भीड़ का बेवजह जमावड़ा, बलवा कराने और सार्वजानिक संपत्ति का नुकसान पहुंचाने, पुलिस की गाड़ी जलवाने एवं झूठे तथ्य गढ़ने का आरोप हैं। ऐसे आरोप में मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान है। कोर्ट से अपील है कि मस्जिद के सदर जफर अली की अंतरिम बेल निरस्त की जाए।

सरकारी वकील ने कहा कि इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम बेल को निरस्त कर दिया। लिहाजा अब परमानेंट बेल की सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख लगा दी गई है। वहीं शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने कहा कि जफर अली की तरफ से सुनवाई के लिए न्यायालय में कहा गया था कि हमारे अंतरिम प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की जाए।

इमोशनल ब्लैकमेल की कोशिश
राहुल दीक्षित ने कहा कि जफर अली ने अंतरिम प्रार्थना पत्र परकम बहस की, हवा-हवाई बातें अत्यधिक की। कोर्ट को इमोशनल ब्लैकमेल करना चाहा। उन्होंने कहा कि आप अधिकारी हैं, आप बेल दे सकते है। इस पर हमारी की तरफ से अपत्ति की गई। हमारी ओर से कहा गया कि प्वाइंट टू प्वाइंट बहस करिए। कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। जब उन्होंने कानूनी बहस की तो अंतरिम बेल को न्यायालय ने सुनी और उनकी जमानत का अंतिम प्रर्थना पत्र खारिज कर दिया।

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