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दिल्ली में BJP सरकार बनने के बाद ‘आप’ को मिला पहला मौका, इस वजह से कानून मंत्री कपिल मिश्रा का मांगा इस्तीफा

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार को कानून मंत्री कपिल मिश्रा से इस्तीफा मांगा है। इसका कारण यह है कि एक अदालत ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में उनकी भूमिका की जांच के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कपिल मिश्रा को इस्तीफा देना चाहिए और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए, क्योंकि उनके खिलाफ पहले से ही सार्वजनिक रूप से सबूत उपलब्ध हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘कपिल मिश्रा को इस्तीफा दे देना चाहिए और जैसे अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वैसे ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है और यह आदेश उनके खिलाफ दंगों में कथित भूमिका की जांच करने के लिए है।’ उन्होंने यह भी कहा कि कपिल मिश्रा को नैतिकता के आधार पर खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

भारद्वाज ने दावा किया कि अदालत में चार वीडियो पेश किए गए, जिनमें से पहले वीडियो में कपिल मिश्रा को दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी के साथ खड़ा देखा जा सकता है। वीडियो में मिश्रा के आसपास अन्य पुलिसकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं, जबकि वह एक नफरत भरी भाषा में भाषण दे रहे हैं।उनके इस भाषण के बाद पत्थरबाजी और दंगे भड़कने का आरोप लगाया जा रहा है। भारद्वाज का दावा है कि वीडियो में साफ तौर पर मिश्रा की भूमिका दिखती है।अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से 16 अप्रैल तक ‘अनुपालन रिपोर्ट’ पेश करने का निर्देश दिया है, जो मामले की अगली सुनवाई की तारीख है।

कपिल मिश्रा के खिलाफ क्या है पूरा मामला?
2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। इस दंगे के बाद कपिल मिश्रा का नाम विशेष रूप से चर्चा में आया था, क्योंकि उनके एक कथित भाषण को भी दंगे की एक वजह के रूप में आरोप लगता रहा है।

दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने पहले ही कपिल मिश्रा की भूमिका को नकार दिया था और कहा था कि मिश्रा का दंगों से कोई संबंध नहीं था। हालांकि, अब अदालत ने यह आदेश दिया है कि मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उनकी भूमिका की जांच की जाए। इस मामले में यमुना विहार के निवासी मोहम्मद इलियास ने याचिका दायर की थी, जिसमें कपिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

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