राजसमंद
राजस्थान के राजसमंद जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता का दर्द फूट पड़ा। कार्यकर्ता ने विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ को चुनाव के समय किए वादे की याद दिलाई। खमनोर हॉस्पिटल को शिफ्ट करने के मुद्दे पर कार्यकर्ता ने नाराजगी जताई। उसने कहा कि लोग उनसे सवाल कर रहे हैं और उनके कान पक चुके हैं। कार्यकर्ता ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि ‘आपके जूते मेरे माथे रख देना’। इस घटना से विधायक और अन्य बीजेपी नेता हैरान रह गए।
आपके जूते मेरे माथे रख देना! आप महाराणा है, कोई बात नहीं, लेकिन लोगों की बातें सुन सुनकर हमारे कान भर चुके हैं।
डालचंद कागरेचा, कार्यकर्ता
बीजेपी विधायक से नाराज था कार्यकर्ता
यह घटना खमनोर में एक लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान हुई। नाथद्वारा के विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ वहां मौजूद थे। तभी बीजेपी कार्यकर्ता डालचंद कागरेचा ने माइक संभाला और अपनी बात रखी। इसका मतलब है कि कार्यकर्ता विधायक से इतना नाराज था कि उसने यह तक कह दिया कि वह विधायक के जूते अपने सिर पर रखने को तैयार है। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह लोगों के सवालों से तंग आ चुका था।
दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने वादा किया था कि खमनोर हॉस्पिटल को कहीं और नहीं ले जाया जाएगा। लेकिन चुनाव जीतने के बाद हॉस्पिटल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। इससे डालचंद कागरेचा और दूसरे कार्यकर्ता नाराज थे.
नई बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं करने का वादा किया था
कागरेचा ने कहा कि हॉस्पिटल को मोलेला ले जाया गया, कोई बात नहीं। लेकिन खमनोर के अस्पताल पर ताले क्यों लग गए हैं? उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान बीजेपी ने खमनोर के हॉस्पिटल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं करने का वादा किया था। लेकिन चुनाव जीतने के 5 महीने के अंदर ही हॉस्पिटल को 500 मीटर दूर मोलेला गांव में ले जाया गया।
हॉस्पिटल दूसरी जगह शिफ्ट हो गया, कोई बात नहीं
कार्यकर्ता ने आगे कहा कि अब क्षेत्र के लोग उन्हें ताने मार रहे हैं। वे उन्हें चुनाव के दौरान किए गए वादे का पुराना वीडियो दिखा रहे हैं। कागरेचा ने कहा कि हॉस्पिटल दूसरी जगह शिफ्ट हो गया, कोई बात नहीं। लेकिन खमनोर के अस्पताल पर ताले क्यों लटक गए हैं? उन्होंने बताया कि रात में महिलाओं को हॉस्पिटल जाने में दिक्कत हो रही है। लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना के बाद वहां मौजूद अन्य नेताओं ने कार्यकर्ता को समझाने की कोशिश की और उसे शांत करवाया। लेकिन इस घटना ने बीजेपी के अंदर की कलह को उजागर कर दिया।