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रूसी प्रलय का स्टेशन अचानक हुआ सक्रिय, ‘द बजर’ ने 24 घंटे में भेजे 4 रहस्यमय संदेश, क्या परमाणु युद्ध का संकेत?

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मॉस्को:

रूस के सीक्रेट प्रलय बंकर की अचानक सक्रियता ने रणनीतिकारों के बीच हलचल मचा दी है। सोवियत युग के रेडियो स्टेशन UVB-76 या ‘द बजर’ ने पिछले 24 घंटे में चार गुप्त संकेत भेजे हैं। सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी शीत युद्ध के चरम पर 70 के दशक से इस रेडियो स्टेशन का इस्तेमाल गुप्त संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए करती रही थी। अब एक बार फिर इसकी सक्रियता ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। रेडियो स्टेशन की गतिविधि पर नजर रखने वाली टेलीग्राम चैनल यूवीबी-76 लॉग ने ये जानकारी दी है।

स्टेशन से चार गुप्त संदेश
चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल को रेडियो स्टेशन ने चार कोड वर्ड को संकेत के रूप में भेजा। ये चार शब्द हैं- नेप्च्यून, थाइमस, फॉक्सक्लॉक और नूताबू। 24 घंटे के भीतर चार गुप्त संदेशों को दुर्लभ अवसर माना जाता है। हालांकि, अभी तक इन संदेशों के संकेतों का स्पष्ट पता नहीं चला है, लेकिन अटकलें हैं कि वे गुप्त सैन्य अभियानों या फिर परमाणु प्रोटोकॉल से जुड़े हैं।

24 घंटे एक्टिव रहती है फ्रीक्वेंसी
यूवीबी-76 की विशेषता इसकी भयानक आवाज है, जो सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे गूंजती रहती है। ऐसा कहा जाता है कि जब तक परमाणु हमले जैसा कुछ बड़ा न होने वाला हो, यह शॉर्टवेब स्टेशन आमतौर पर एक स्थिर ध्वनि के अलावा कुछ भी नहीं भेजता है। हालांकि, फरवरी में रेडियो स्टेशन ने 24 घंटे के भीतर 25 संदेश भेजे।

कई लोगों का मानना है कि यह रेडियो स्टेशन वास्तव में एक सैन्य संचार उपकरण है, जो संभवतः दूरस्थ स्टेशनों के साथ संचार करने या कुछ सैन्य इकाइयों को सक्रिय करने के लिए उपयोग किया जाता है। वहीं, कुछ तो यह भी मानते हैं कि एक सिस्टम का हिस्सा है, जो रूस पर हमले की स्थिति में स्वचालित रूप से सैन्य प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देगा।

क्या है यूवीबी-76 स्टेशन?
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर शोध करने वाले प्रोफेसर डेविड स्टुपल्स ने द सन को बताया कि यूवीबी-76 एक हाई फ्रीक्वेंसी वाला बैंड है। इसे पूरे रूसी क्षेत्र में सुना जा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि इसका फायदा यह है कि इस तरह के सिग्नल को उपग्रहों या इंटरनेट के बिना प्रसारित किया और सुना जा सकता है। इससे पुतिन और उनके जासूसों के लिए सैन्य खुफिया जानकारी को रेडार के नीचे भेजना आसान हो जाता है। प्रोफेसर स्टुपल्स ने कहा, सिग्नल कभी भी वायुमंडल के बाहर नहीं जाता है।

इस स्टेशन से लगातार संचार को जारी रखने के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, अगर प्रसारण बंद हो गया और फ्रीक्वेंसी का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हो गया तो कोई भी संकेत छीन सकता है। प्रोफेसर स्टुपल्स ने बताया कि एकमात्र तरीका जिससे आप की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं, उस पर प्रसारण जारी रखना है। इसलिए रूस जो कर रहा है, वो इस फ्रीक्वेंसी को रिजर्व कर रहा है।

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