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पुतिन जंग रोकने के लिए डील को तैयार लेकिन क्या क्रीमिया-डोनबास इलाका छोड़ेगा यूक्रेन?

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नई दिल्ली,

पिछले तीन सालों से अधिक समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक बयान से अहम मोड़ आया है. राष्ट्रपति पुतिन ने युद्ध समाप्त करने के लिए यूक्रेन को सीधी बातचीत का ऑफर दिया है. पुतिन ने कहा है कि वो ईस्टर युद्धविराम के बाद अब और युद्धविराम के लिए तैयार हैं. रूसी राष्ट्रपति ने ईस्टर के मौके पर एक दिन के एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की थी. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बढ़ते दबाव के बीच पुतिन ने युद्धविराम के लिए यूक्रेन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया है.

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन शुरू होने के बाद से दोनों पक्षों में किसी तरह की बातचीत नहीं हुई है. राष्ट्रपति पुतिन के सीधी बातचीत का संकेत देने के बाद रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन की तरफ से भी इस संबंध में टिप्पणी सामने आई है.क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘जब राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों पर हमला न करने के मुद्दे पर द्विपक्षीय चर्चा सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा करना संभव है, तो राष्ट्रपति के मन में यूक्रेनी पक्ष के साथ बातचीत और विचार-विमर्श की बात थी.’
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इधर, जेलेंस्की ने रात को जारी को एक वीडियो संदेश में कहा कि ‘यूक्रेन रूस से सीधा जवाब चाहता है कि वो नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकेगा या नहीं.’इस हफ्ते लंदन में यूक्रेन शांति समझौते के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों से बातचीत करने वाला है. पिछले हफ्ते पेरिस में भी एक वार्ता हुई थी जिसमें युद्ध रोकने पर बात हुई थी.

रूस और यूक्रेन दोनों ही पक्षों पर इस वक्त युद्ध रोकने के लिए अमेरिका का दबाव बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से धमकी भी दी गई है कि अगर जल्द ही कोई शांति समझौता नहीं होता तो वो भविष्य में होने वाली बातचीत से बाहर हो जाएंगे. ट्रंप के इसी दबाव के बीच पुतिन ने यूक्रेन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया है.

क्या क्रीमिया और डोनबास इलाके को छोड़ने पर राजी होगा यूक्रेन?
लेकिन सीधी बातचीत के पुतिन के प्रस्ताव के बीच एक सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यूक्रेन डोनबास और क्रीमिया को छोड़ने पर राजी होगा. रूस ने पहले ही कह दिया है कि बातचीत में क्रीमिया और डोनबास इलाके पर कोई बात नहीं होगी यानी वो किसी भी तरह से इन इलाकों को छोड़ने के लिए राजी नहीं है.

रूस ने 2014 में यूक्रेन के साथ युद्ध में क्रीमिया पर अपना कब्जा किया था. इस कब्जे के बाद यूक्रेन का डोनबास इलाका जिसमें दोनेत्स्क और लुहांस्क शामिल है, अस्थिर हो उठा. वहां रूस समर्थित विद्रोहियों ने यूक्रेनी सेना से लड़ाई शुरू कर दी जो रूस के यूक्रेन पर हमला करने तक जारी रही.

फरवरी 2022 में जब दोबारा युद्ध शुरू हुआ तब रूस ने डोनबास इलाके पर अपना कब्जा कर लिया. रूस ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया और खेरसॉन पर भी अपना कब्जा कर लिया है.रूस इन चारों इलाकों के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण रखता है लेकिन इनके संपूर्ण क्षेत्र को कब्जाने में नाकाम रहा है. केवल लुहांस्क पर ही रूस का पूर्ण नियंत्रण है.

रूस यूक्रेन को एक ‘नाजी देश’ कहकर संबोधित करता है. रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया था तब पुतिन ने यूक्रेन के विद्रोही राज्यों को स्वतंत्र घोषित कर दिया था. उन्होंने कहा था कि इन इलाकों में रूसी बोलने वाले लोग हैं जिनकी यूक्रेन से रक्षा की जानी चाहिए.किसी भी शांति समझौते के लिए रूस की मांग रही है कि इन चारों इलाकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूसी क्षेत्र की मान्यता मिले और यूक्रेनी सैनिक इन इलाकों से पूरी तरह से बाहर निकल जाएं.

क्या कहते हैं जेलेंस्की?
पिछले साल दिसंबर में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि वो अपने इलाके नहीं छोड़ सकते हैं लेकिन उनके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वो रूसी कब्जे से अपने इलाकों को छुड़ा सकें.

जेलेंस्की ने कहा था, ‘हम अपने इलाकों को नहीं छोड़ सकते हैं. यूक्रेन का संविधान हमें ऐसा करने से रोकता है. ये इलाके लेकिन अब रूसी नियंत्रण में हैं. हमारे पास उतनी ताकत नहीं है कि हम दोबारा उन इलाकों को कब्जे से छुड़ा सकें. अब हमें बस अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहारा है कि वो राजनयिक दबाव डालें ताकि पुतिन बातचीत की टेबल पर आएं.’

बीते शुक्रवार को ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि ट्रंप प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए शांति समझौते में क्रीमिया को रूसी क्षेत्र को मान्यता दे सकते हैं. लेकिन जेलेंस्की का कहना है कि वो किसी भी शांति समझौते के रूप में क्रीमिया या किसी अन्य इलाके को रूस का हिस्सा नहीं मानेंगे.

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