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मां नौकरानी, पिता मजदूर, उरी में खोया इकलौता बेटा, कलेजा चीर देगी शहीद मुरली नाइक की कहानी

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अमरावती

मुदवथ मुरली नाइक हमारा इकलौता बेटा था और उसने देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राण गंवा दिए। हमें उस पर गर्व है लेकिन दुख है कि वह हमें बेसहारा छोड़ गया। अब हमारा कोई सहारा नहीं बचा। जिंदगी भर मजदूरी की, बुढ़ापे में बेटे का सहारा था लेकिन नीच पाकिस्तान ने वह भी छीन लिया। यह शब्द हैं आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले में रहने वाले श्रीराम नाइक के। वह यह कहते हुए बिलख पड़े और वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू बह निकले।

गोरंटला मंडल के कल्ली थांडा गांव निवासी मुरली नाइक ‘अग्निवीर योजना’ के तहत सेना में भर्ती हुए थे। उनके पिता ने भारतीय सेना द्वारा दी गई हृदय विदारक खबर का जिक्र करते हुए कहा कि मुरली नाइक शुक्रवार तड़के जम्मू-कश्मीर में गोलीबारी के दौरान शहीद हो गया।

‘अब हम किसके सहारे जिएंगे’
श्रीराम नाइक ने कहा, ‘मेरा बेटा देश के लिए शहीर हो गया। उसने देश के लिए लड़ाई लड़ी। हमें दुख इस बात का है कि मेरा एक ही बेटा है। हम उस पर निर्भर थे और हमारा सहारा चला गया। अब हम बेसहारा हो गए हैं, मेरी पत्नी और मैं दोनों अब किसके सहारे जिएंगे। जो भी समाधान हो, मैं इसे देश पर छोड़ता हूं। जो भी निर्णय होगा, वह देश को ही लेना है।’

अधिकारियों ने दी शहीद होने की सूचना
श्रीराम नाइक ने बताया कि उनकी पत्नी ज्योति बाई के पास शुक्रवार सुबह 9 बजे सेना के एक अधिकारी का फोन आया। उसने हिंदी में बात की और पूछा कि वह मुरली नाइक की कौन हैं। ज्योति ने कहा कि मुरली मेरा बेटा है। उन्होंने मेरी उनसे कहा कि फोन अपने पति को दे दीजिए। उन्होंने बताया कि मुरली शहीद हो गया है।

कांप गए श्रीराम नाइक
श्रीराम नाइक ने बताया, ‘खबर सुनते ही मेरा दिमाग सुन्न हो गया। पांव तले जमीन खिसक गई। मेरा मुंह सूख गया और मैं कांपने लगा। जमीन पर बैठ गया। पत्नी को बताया तो उसकी भी चीख निकल गई। मैंने मेहनत मजदूरी करके बेटे को बढ़ाया। उसने पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि सेना में जाकर देश की सेवा करेगा।’

2022 में हुआ था भर्ती
श्रीराम नाइक ने कहा कि वह (मुरली नाइक) नवंबर 2022 में अग्निवीर के तौर पर सेना में शामिल हुआ था और महाराष्ट्र के नासिक में प्रशिक्षण लिया था। 23 वर्षीय नाइक भारतीय सेना की उत्तरी कमान की 851 लाइट रेजिमेंट से जुड़े थे। नाइक ने आखिरी बार 6 से 20 जनवरी 2025 के बीच 15 दिनों की छुट्टी ली थी और घर आया था।

असम में भी रही तैनाती
प्रशिक्षण के बाद नाइक को असम में तैनात किया गया, जहां उन्होंने एक साल तक काम किया और बाद में छह महीने के लिए उसे जम्मू स्थानांतरित कर दिया गया। श्रीराम नाइक ने कहा कि जनवरी में 15 दिन की छुट्टी के बाद वह ड्यूटी पर वापस चला गया और अंततः लड़ाई में मारा गया। शहीद सैनिक की मां ने याद किया कि उनके बेटे ने 7 मई को उन्हें फोन किया था और उनकी खैरियत पूछने के साथ यह भी पूछा था कि उन्होंने खाना खाया है या नहीं।

माता-पिता से कहा था अब आराम करो
एम मुरली नाइक के पिता ने बताया कि वह 25 साल पहले मुंबई आए। यहां कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मजदूरी। पत्नी ज्योति घरों में बर्तन धोने का काम करती थीं। परिवार घाटकोपर की झुग्गी में रहता था। जब बेटा अग्निवीर के जरिए सेना में भर्ती हो गया तो उसने दोनों को आराम करने को कहा। फिर वे मुंबई छोड़कर अपने गांव आंध्र प्रदेश वापस आ गए थे।

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