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पाकिस्तान के साथ युद्धविराम के लिए भारत पर था अमेरिकी दबाव? बीजेपी ने दे दिया जवाब

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नई दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव कम हुआ है, वह भारत की शर्तों पर हुआ है। BJP ने उन बातों को गलत बताया है जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका के दबाव में यह सब हुआ है। पार्टी का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह से भारत के हिसाब से हुआ है। BJP ने कहा कि पहले ऐसा होता था कि भारत को कुछ फायदे छोड़ने पड़ते थे, लेकिन इस बार सरकार ने सब कुछ बदल दिया है। BJP के एक नेता ने कहा कि भारत की नई ‘युद्ध नीति’ है। इसके अनुसार, अगर कोई भी आतंकी हमला होता है, तो उसे भारत के खिलाफ ‘युद्ध’ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में सिर्फ अमेरिका और इजराइल के पास ही ऐसी नीतियां हैं। इससे पता चलता है कि भारत दुनिया में कितना मजबूत हो गया है।

भारत की स्थिति और भी मजबूत-बीजेपी
बीजेपी नेता ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर अभी भी भारत का नियंत्रण है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जो भी चल रहा है, उससे इस संधि पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पहले वर्ल्ड बैंक इस संधि की गारंटी लेता था, लेकिन अब उसने इससे दूरी बना ली है। इससे भारत की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। BJP नेता ने कहा, “भारत एक ताकतवर अर्थव्यवस्था बन रहा है, जबकि पाकिस्तान एक कमजोर देश है। हमारा ध्यान 140 करोड़ भारतीयों की भलाई पर है। हम एक ऐसे देश पर समय बर्बाद नहीं करना चाहते जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है।”

भारत को पहले शर्तें माननी पड़ती थीं
BJP ने यह भी कहा कि पहले के समझौतों में भारत को अपने फायदे छोड़ने पड़े थे। 1949 में कराची समझौते के तहत युद्धविराम हुआ था। यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता और संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी में हुआ था। 1965 की लड़ाई ताशकंद घोषणा के साथ खत्म हुई थी। इसमें सोवियत संघ और अमेरिका ने मध्यस्थता की थी। भारत को जीते हुए इलाके वापस करने पड़े थे।

पहले भारत चूक गया था
1971 की लड़ाई में पाकिस्तान ने हार मान ली थी, लेकिन फिर भी शिमला समझौता हुआ। इस पर मॉस्को और वाशिंगटन का प्रभाव था। भारत ने 99,000 कैदियों को रिहा कर दिया, लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ। पाकिस्तान ने POK खाली नहीं किया और सीमाएं भी तय नहीं हुईं। श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) का ऑपरेशन (1987-1990) बहुत महंगा साबित हुआ और उसे वापस बुलाना पड़ा। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जान भी चली गई। 1999 में कारगिल युद्ध में भी ऐसा ही हुआ। क्लिंटन प्रशासन ने युद्धविराम कराया और भारत को अपनी जीत रोकनी पड़ी। भारत को एक अच्छा मौका मिला था, लेकिन वह चूक गया।

भारत की शर्तों पर तनाव कम हुआ
BJP का कहना है कि अभी जो तनाव कम हुआ है, वह भारत की शर्तों पर हुआ है। इसमें देश की सुरक्षा और आर्थिक तरक्की को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। पार्टी का कहना है कि इस तरीके से भारत एक ताकतवर देश बनेगा और उसे पहले की तरह कोई नुकसान नहीं होगा। भारत पर किसी का दबाव नहीं होगा।

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