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सुप्रीम कोर्ट के कौन-कौन चीफ जस्टिस रहे, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद पद लिया

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नई दिल्ली:

मंगलवार (13 मई, 2025) को सुप्रीम के चीफ जस्टिस (CJI) पद से रिटायर होने वाले जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि वह रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लेंगे, लेकिन कानून के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देते रहेंगे। जस्टिस खन्ना 11 नवंबर, 2024 को CJI नियुक्त हुए थे। उनकी जगह बुधवार (14 मई, 2025) को जस्टिस बीआर गवई ने नए CJI के रूप में शपथ लिया। जस्टिस संजीव खन्ना ने जिस तरह से घोषणा की है कि वह रिटायर होने के बाद कोई भी पद नहीं लेंगे, ऐसा सभी CJI और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों के साथ नहीं हुआ है। देश में कई ऐसे CJI और सुप्रीम कोर्ट के जज हुए हैं, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है।

राज्यसभा सदस्य बने जस्टिस रंजन गोगोई
हाल के वर्षों में रिटायरमेंट के बाद कोई पद स्वीकार करने वाले सुप्रीम कोर्ट के सबसे चर्चित CJI में जस्टिस रंजन गोगोई का नाम सबसे आगे है। अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ की अगुवाई इन्होंने ही की थी। जस्टिस गोगोई नवंबर, 2019 में CJI पद से रिटायर हुए और कुछ महीने बाद इन्हें राज्यसभा के सदस्य के तौर पर मनोनीत किया गया। उन्होंने मार्च, 2020 में राज्यसभा के सांसद के रूप में शपथ ली।

पूर्व चीफ जस्टिस पी सदाशिवम गवर्नर बने
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पी सदाशिवम अप्रैल 2014 में अपने पद से रिटायर हुए। उसी साल नवंबर में उनकी नियुक्ति केरल के गवर्नर के तौर पर हुई। उन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूर्ण किया। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले जजों के इस तरह का पद स्वीकारने की फेहरिस्त काफी लंबी है।

सुप्रीम कोर्ट के कई और जजों को भी मिला पद
दिसंबर 2016 में एक थिंक टैंक विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की एक स्टडी सामने आई थी, उसके अनुसार पूर्व CJI एचएल दत्तू राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बने। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बने। इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट के एक और रिटायर जज जस्टिस बीएस चौहान भी विधि आयोग के अध्यक्ष रहे।

जजों की पोस्ट-रिटायरमेंट नियुक्ति की बाध्यता
इसी स्टडी के अनुसार उस साल 12 फरवरी तक सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले पिछले 100 जजों में से 70 जजों ने अपनी रिटायरमेंट के बाद कोई न कोई पद हासिल किया था। लेकिन, इस स्टडी में यह भी बताया गया था कि इस तरह की नियुक्तियों की एक बड़ी वजह ये है कि कुछ कानूनों के अनुसार कुछ पदों पर जजों की नियुक्ति जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया कि जितने भी नियुक्तियों का अध्ययन किया गया, उनमें से 56% कानून की जरूरतों के मुताबिक ही की गईं। इस रिपोर्ट के अनुसार इनमें अकेले केंद्र ही लगभग 36% नियुक्तियां करता है। ये नियुक्तियां कई जगहों पर होती हैं। जैसे कि न्यायाधिकरण (tribunals), आयोग (commissions), तदर्थ समितियां (ad hoc committees) और लोकायुक्त (Lokayuktas) जैसे सरकारी पद शामिल हैं।

विभिन्न वैधानिक पदों पर कार्य करने वाले जज
इसी तरह से जून 2023 में बार एंड बेंच ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि इससे पहले के पांच साल में सुप्रीम से रिटायर होने वाले 21% जज किसी न किसी पद पर नियुक्त किए गए। इनमें जस्टिस एके गोयल (चेयरपर्सन, नेशनल ग्रीम ट्रिब्यूनल), जस्टिस अरुण मिश्रा (अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग), जस्टिस अशोक भूषण (चेयरपर्सन, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल), जस्टिस हेमंत गुप्ता (चेयरपर्सन,NDIAC) और जस्टिस अब्दुल नजीर (गवर्नर, आंध्र प्रदेश) का नाम शामिल है। इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज जस्टिस एम फातिमा बीवी जो 1992 में रिटायर हुईं, वह 1997 में तमिलनाडु की राज्यपाल नियुक्त हुईं और 2001 तक इस पद पर कार्य किया।

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