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Saturday, March 7, 2026
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राष्ट्र हित से ऊपर राजनीति? ऑपरेशन सिंदूर पर मल्टी-पार्टी डेलिगेशन की सियासत का जिम्मेदार कौन

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नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद और उसके खिलाफ शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर दुनिया भर के देशों तक भारतीय पक्ष पहुंचाने के लिए जिस मल्टी-पार्टी डेलिगेशन की घोषणा की है, उसको लेकर जबरदस्त राजनीतिक विवाद हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रतिनिधिमंडल से अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सरकार अपनी मर्जी से सदस्यों का नाम तय नहीं कर सकती। TMC का कहना है कि केंद्र सरकार को विपक्षी दलों से बात करके प्रतिनिधि चुनने चाहिए थे। यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देश, दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीकी देशों तक जाकर इसके बारे में पूरी जानकारी देगा। लेकिन, जिस प्रतिनिधिमंडल को ऑपरेशन सिंदूर में देश की एकजुटता प्रदिर्शित करने के लिए बनाया गया है, उसी पर राजनीतिक हितों की वजह से विवाद किया जा रहा है।

‘तृणमूल का प्रतिनिधि कौन होगा, केंद्र कैसे चुनेगा’
TMC अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी पार्टी को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए नाम भेजने का कोई अनुरोध नहीं मिला। उन्होंने कहा,’वे अपनी मर्जी से सदस्य का नाम तय नहीं कर सकते। यह उनका चुनाव नहीं है, पार्टी [TMC] तय करेगी। अगर वे अनुरोध करते हैं तो मूल पार्टी तय करेगी, जैसी कि प्रथा है। हम विदेश मामलों की नीतियों पर केंद्र सरकार के साथ पूरी तरह से हैं।’ खबरें हैं कि TMC ने सरकार को बता दिया है कि केंद्र द्वारा नामित पार्टी सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में नहीं जाएंगे। बनर्जी ने पूछा, ‘केंद्र सरकार कैसे तय कर सकती है कि तृणमूल का प्रतिनिधि कौन होगा? उन्हें विपक्षी दलों के साथ चर्चा करनी चाहिए थी कि कौन सी पार्टी किसे भेजेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिकरण नहीं करने का दावा
कहा जा रहा है कि तृणमूल के लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्वास्थ्य कारणों से प्रतिनिधिमंडल में जाने से मना कर दिया था, उसके बाद सरकार ने पठान को चुना। बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सरकार के साथ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को अच्छी नीयत दिखानी चाहिए और प्रतिनिधियों का नाम तय करने से पहले दूसरी पार्टियों से सलाह लेनी चाहिए। बनर्जी ने कहा, ‘BJP सत्ता में है। वे अपनी पार्टी के लिए फैसला कर सकते हैं, लेकिन कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के लिए नहीं…।’ हालांकि, प्रतिनिधिमंडल से पीछे हटने के साथ ही उनका यह भी दावा है कि TMC एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले का राजनीतिकरण नहीं किया है। उनकी पार्टी प्रतिनिधिमंडल का बहिष्कार नहीं कर रही है।

कांग्रेस का दावा नाम मांगा, लेकिन की अपने मन की
सिर्फ TMC नहीं है। इससे पहले से ही कांग्रेस इस मामले में सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के लिए पार्टी से नाम मांगे थे, लेकिन उसकी ओर से सुझाए गए तीन नेताओं के नामों को खारिज कर दिया गया। केंद्र सरकार ने कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर, पंजाब के सांसद अमर सिंह, सलमान खुर्शीद, लोकसभा सांसद मनीष तिवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को इस प्रतिनिधिमंडल का सदस्य बनाया है। जबकि, कांग्रेस का कहना है कि उसने सरकार के अनुरोध पर चार सांसदों – आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को नामित किया था। लेकिन, आनंद शर्मा को छोड़कर बाकी किसी को भी सरकार की सूची में जगह नहीं मिली।

हमने कभी कांग्रेस से नाम देने को नहीं कहा- सरकार
लेकिन, ToI को दिए एक खास इंटरव्यू में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिनमंडल भेजे जाने के बारे में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सिर्फ शिष्टाचार के नाते जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि, ‘…हमने उनसे (कांग्रेस) कभी भी नाम देने को नहीं कहा। हमने सिर्फ शिष्टाचार के नाते विपक्ष के दोनों नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को प्रतिनिधिमंडल के बारे में बताया और ये कि उनकी पार्टी से उनके चार सहयोगी मिशन का हिस्सा होंगे….’। कांग्रेस की ओर से यहां तक कहा गया कि प्रतिनिधिमंडल में थरूर और तिवारी को पार्टी नेतृत्व को चिढ़ाने के लिए चुना गया है। इसपर रिजिजू ने कहा, ‘यह एक आरोप है। हमने किसी पार्टी की अंदरूनी बातों और असुरक्षाओं को ध्यान में नहीं रखा। हमने सलमान खुर्शीद और पंजाब से उनके सांसद अमर सिंह को भी चुना। इस बारे में आपका क्या कहना है?’

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