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Wednesday, March 11, 2026
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सरकारी बस से ‘मणिपुर’ नाम हटाने का विरोध, प्रदर्शन के बीच राज्यपाल को सेना के हेलीकॉप्टर से ले जाया गया राजभवन

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इंफाल:

मणिपुर में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब छात्रों और महिलाओं के एक समूह ने राज्य के नाम को सरकारी बस से हटाए जाने के विरोध में रैली निकालने की कोशिश की। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की वापसी से पहले इम्फाल वेस्ट जिले में इस प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारी छात्र और महिलाएं क्वाकेथेल क्षेत्र में एकत्र हुए थे और उनका इरादा लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित राजभवन तक मार्च करने का था। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इंफाल एयरपोर्ट से लेकर केइसमपत तक एक मानव श्रृंखला बना दी, जो कि राजभवन से केवल 200 मीटर दूर है।

पुलिस की कड़ी कार्रवाई
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हालात तनावपूर्ण थे, लेकिन स्थिति को काबू में रखने के लिए सुरक्षाबलों ने संयम के साथ कार्रवाई की। पूरे टिड्डिम रोड पर असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स सहित केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई थी।

राज्यपाल का आगमन और विशेष सुरक्षा
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला सोमवार दोपहर को दिल्ली से इंफाल पहुंचे। प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें एयरपोर्ट से सीधे कांगला किला में ले जाया गया, जो कि राजभवन से मात्र 300 मीटर की दूरी पर है। वे सेना के हेलीकॉप्टर से किले में पहुंचे ताकि भीड़भाड़ से बचा जा सके। बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की जड़ें 20 मई को उखरुल में आयोजित शिरुई लिली महोत्सव से जुड़ी हैं। उस दिन पत्रकारों को ले जा रही एक सरकारी बस से राज्य का नाम ‘मणिपुर’ छिपा दिया गया था। इस घटना ने आम जनता, खासकर युवाओं और महिलाओं में आक्रोश फैला दिया। उनका आरोप है कि यह राज्य की अस्मिता का अपमान है।

माफी की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक राज्यपाल इस कृत्य के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कुछ संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि यह सरकार की सोची-समझी रणनीति थी, जिससे राज्य की पहचान को दबाया जा सके।

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