भोपाल।
मध्यप्रदेश में सभी विधायकों के घर या कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम बनाने के लिए सरकार ने 5–5 लाख रुपए का फंड जारी किया है। लेकिन इस व्यवस्था पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सरकार द्वारा कलेक्टरों के माध्यम से जिलेवार टेंडर निकालकर सामान खरीदने की प्रक्रिया पर कई विधायक नाराज हैं। 5 दिसंबर को सीएम हाउस में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा हुई। आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय और चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने कहा कि यदि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम विधायक के कार्यालय पर बनना है, तो उन्हें स्व-विवेक से अच्छा और टिकाऊ सामान खरीदने की अनुमति दी जाए।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि कलेक्टर या किसी एजेंसी के भरोसे यह काम हुआ, तो “सबसे सस्ता और चाइनीज सामान” लगवा दिया जाएगा, जो जल्दी खराब हो जाएगा। “हम बिल–रसीद जमा कर देंगे, पर सामान ब्रांडेड चाहिए” चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि कलेक्टरों को दिए गए फंड में टेंडर के चक्कर में कम गुणवत्ता वाला चाइनीज सामान खरीदा जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि “यदि विधायक को अधिकार देंगे तो हम बेहतर क्वालिटी का सामान खरीदेंगे। हम सीधे भुगतान कर बिल भी दे देंगे। आपकी मंशा भी पूरी होगी और VC रूम भी लंबे समय चलेगा।” सीएम ने इस सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
