नई दिल्ली |
देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने गुरुवार को आयोजित अपनी बोर्ड बैठक में भविष्य की विकास रणनीतियों को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। कंपनी सचिव डॉ. योगेश आर छाबड़ा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य रेलवे, ऊर्जा क्षेत्र में पैठ मजबूत करना और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए बड़ी साझेदारी
रेलवे क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का विस्तार करते हुए, भेल बोर्ड ने टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के साथ एक जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने के समझौते को हरी झंडी दे दी है। यह नई कंपनी मुख्य रूप से आधुनिक ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों’ के व्यापक रखरखाव का कार्य संभालेगी। इस महत्वपूर्ण साझेदारी के लिए अब ‘डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट’ से अंतिम मंजूरी ली जाएगी, जिसके बाद जेवी समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कोल गैसीफिकेशन में 3064.46 करोड़ का निवेश
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, बोर्ड ने भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड में ₹3064.46 करोड़ के इक्विटी निवेश को मंजूरी प्रदान की है। यह निवेश अगले चार वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बीसीजीसीएल, कोल इंडिया लिमिटेड और भेल का एक संयुक्त उद्यम है, जो कोयले से रसायन बनाने की तकनीक पर केंद्रित है।
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हरिद्वार और हैदराबाद की इकाइयों का होगा विलय
कंपनी ने अपने आंतरिक ढांचे को सरल बनाने के लिए दो प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में विलय की घोषणा की है, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे:
हरिद्वार इकाई: यहाँ स्थित ‘सेंट्रल फाउंड्री फोर्ज प्लांट’ (सीएफएफपी) का विलय अब ‘हैवी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट प्लांट’ (एचईईपी) में कर दिया जाएगा। अब यह पूरी इकाई केवल एचईईपी के नाम से जानी जाएगी।
हैदराबाद इकाई: यहाँ के ‘प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग एंड सिस्टम्स डिवीजन’ (पीई एंड एसडी) को ‘हैवी पावर इक्विपमेंट प्लांट’ (एचपीईपी) के साथ जोड़ दिया गया है। विलय के बाद इसे एचपीईपी के नाम से पहचाना जाएगा।
