भोपाल
राजधानी में गुरुवार को भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुआ। सुबह के पहले सूर्योदय पर श्रद्धालुओं ने शंखनाद के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर नववर्ष का स्वागत किया। इस अवसर पर मंदिरों में मां शैलपुत्री की आराधना के साथ घट स्थापना की गई और भक्तों ने सुख-समृद्धि की कामना के साथ जवारे बोए। भेल क्षेत्र स्थित पिपलानी के श्री गणेश मंदिर परिसर में मराठी सांस्कृतिक मंडल द्वारा स्थापित 31 फीट ऊंची गुड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसे प्रदेश की सबसे ऊंची गुड़ी बताया जा रहा है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के जयघोष के साथ भव्य प्रभात फेरी निकाली, जिससे पूरा क्षेत्र महाराष्ट्र की जीवंत संस्कृति और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
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दूसरी ओर, आध्यात्मिक चेतना के केंद्र गायत्री शक्तिपीठ द्वारा उपवन स्वास्थ्य पार्क में सामूहिक सूर्य अर्घ्यदान का आयोजन किया गया, जिसमें 108 साधकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं। इसके साथ ही नौ दिवसीय गायत्री महामंत्र अनुष्ठान और विश्व कल्याण के लिए विशेष यज्ञ का भी शुभारंभ हुआ। शहर के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर आशिमा अनुपमा सिटी स्थित श्री शिव नारायण मंदिर और अन्य देवालयों में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किए गए हैं। पूरे शहर में आकर्षक विद्युत सज्जा और भगवा ध्वजों के बीच भक्तिमय वातावरण निर्मित है, जो चैत्र नवरात्रि के समापन तक निरंतर जारी रहेगा।
