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Monday, March 23, 2026
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इराक से अमेरिकी और नाटो (NATO) सेना की ‘घर वापसी’! क्या ईरान के डर से खाली किए गए सैन्य ठिकाने?

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मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। दशकों तक इराक की धरती पर अपनी धाक जमाने वाली अमेरिकी और नाटो (NATO) सेनाओं ने बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है। इराक सरकार ने आधिकारिक ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना अब उनके संघीय क्षेत्रों से पूरी तरह बाहर जा चुकी है। 20 साल से ज्यादा समय तक ‘अल-असद’ जैसे बड़े बेस पर काबिज रहने के बाद, अब वहां का नजारा बिल्कुल बदल चुका है। इसे ईरान के बढ़ते दबाव और क्षेत्रीय राजनीति में आए बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी सलाहकारों ने भी छोड़ा साथ, अब खुद मोर्चा संभालेगी इराकी फौज

इराकी रक्षा मंत्रालय ने इस ऐतिहासिक घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अल-असद एयर बेस समेत कई महत्वपूर्ण ठिकानों से अमेरिकी सलाहकारों और सैनिकों की आखिरी टुकड़ी भी रवाना हो चुकी है। ये वो ठिकाने थे जहां से अमेरिका पिछले दो दशकों से पूरे मिडिल ईस्ट पर नजर रखता था। अब इन बेस पर पूरी तरह से इराकी सुरक्षा बलों का नियंत्रण है। हालांकि, उत्तर में स्थित कुर्दिस्तान के स्वायत्त क्षेत्र में अभी भी कुछ अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, लेकिन उनकी विदाई के लिए भी सितंबर 2026 की डेडलाइन तय कर दी गई है।

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच बदला गया मिशन का ठिकाना

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि नाटो (NATO) ने भी इराक में अपने ट्रेनिंग मिशन को पूरी तरह बंद कर दिया है। मार्च 2026 की शुरुआत में ही नाटो ने अपने सैंकड़ों सैनिकों को इराक से हटाकर यूरोप शिफ्ट कर दिया था। 2018 से इराकी फौज को ट्रेनिंग दे रहे इस मिशन को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। अब नाटो के अधिकारी इराक को अपनी सलाह और मदद सीधे इटली के नेपल्स स्थित मुख्यालय से ‘रिमोट’ तरीके से देंगे।

ईरानी मिलिशिया के दबाव ने तेज की अमेरिकी वापसी की रफ्तार

सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही कुछ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें अमेरिकी सैनिकों के काफिले को जॉर्डन के रास्ते बाहर निकलते देखा जा सकता है। इन वीडियो को इराकी नागरिकों ने अपने कैमरों में कैद किया है। जानकारों का कहना है कि ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूहों ने अमेरिकी बेस पर लगातार हमले कर उनकी नाक में दम कर रखा था, जिसकी वजह से वापसी की प्रक्रिया को तेज करना पड़ा। ‘कैंप विक्ट्री’ जैसे ठिकानों पर तो मिलिशिया ने सुरक्षित निकासी के लिए 24 घंटे के सीजफायर का भी ऐलान किया है।

अब बाहरी दखल के बिना सुरक्षित होगा मिडिल ईस्ट?

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने अमेरिकी सेना की विदाई को क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने साफ कहा कि अब मिडिल ईस्ट की सुरक्षा यहां के देश खुद करेंगे और इसके लिए किसी बाहरी ताकत (अमेरिका) की जरूरत नहीं है। ईरान का मानना है कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी ही पूरे क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा थी। इराक से इन फौजों का हटना इराक की संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे ईरान का दबदबा और बढ़ सकता है।

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कुर्दिश इलाकों में अमेरिकी मौजूदगी बनी हुई है चर्चा का विषय

भले ही बगदाद और मध्य इराक से अमेरिकी सेना जा चुकी है, लेकिन उत्तरी कुर्दिश इलाकों में अभी भी उनका थोड़ा ‘तामझाम’ बाकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुर्दिश नेताओं के साथ हुए समझौते के तहत वहां कुछ सैनिक सितंबर 2026 तक बने रह सकते हैं। लेकिन ईरान समर्थित मिलिशिया ने अल्टीमेटम दे दिया है कि वे पूरे देश को विदेशी मुक्त देखना चाहते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में इराक की जमीन पर शांति लौटती है या फिर यह ‘वैक्यूम’ किसी नई जंग को जन्म देता है।

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