भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद यूनुस ने खराब मौसम, माइनस तापमान और बर्फबारी के बीच 29 अप्रैल 2026 को लेह से दुनिया के प्रसिद्ध दर्रों में से एक खारदुंग ला तक सोलो साइक्लिंग कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
करीब 80 किलोमीटर (आना-जाना) की इस चुनौतीपूर्ण राइड में चढ़ाई के दौरान उन्हें लगभग 8 घंटे का समय लगा। डॉ. यूनुस ने बताया कि जिस दिन उन्होंने राइड की, उस दिन लेह में बारिश हो रही थी, जबकि ऊपर खारदुंग ला क्षेत्र में बर्फबारी हो रही थी। खराब मौसम के कारण कई बाइकर्स को आगे जाने से रोका जा रहा था, लेकिन परिस्थितियों का आकलन करने के बाद उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की।
उन्होंने बताया कि सुबह लेह में तापमान माइनस 1 डिग्री सेल्सियस था, जबकि ऊंचाई पर इससे भी अधिक ठंड थी। चढ़ाई के दौरान लगातार मेहनत की वजह से ठंड कम महसूस होती है, लेकिन ढलान में तेज गति से उतरते समय ठंड काफी ज्यादा लगती है। डॉ. यूनुस के अनुसार, लेह से खारदुंग ला तक करीब 40 किलोमीटर की चढ़ाई बेहद कठिन रही, जिसे पूरा करने में करीब 8 घंटे लगे। वहीं वापसी का सफर ढलान होने के कारण कम समय में पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि इतनी ऊंचाई पर साइक्लिंग करने से पहले कम से कम दो दिन का एक्लिमेटाइजेशन जरूरी होता है और इनर लाइन परमिट की प्रक्रिया भी समय लेती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की सोलो राइड बिना तैयारी के नहीं करनी चाहिए। विशेष ट्रेनिंग और बेहतर तैयारी जरूरी होती है, साथ ही टीम और सपोर्ट सिस्टम के साथ करना ज्यादा सुरक्षित रहता है। इस बार उन्होंने पूरी सुरक्षा योजना बनाकर ‘कैल्कुलेटेड रिस्क’ लिया था। रास्ते में साउथ पुलु और टॉप पर सेना की तैनाती तथा ऑक्सीजन सपोर्ट भी उपलब्ध रहता है। डॉ. यूनुस इससे पहले 2016 और 2017 में मनाली से लेह होते हुए खारदुंग ला तक टीम के साथ साइक्लिंग कर चुके हैं। वहीं 2023 में उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़कों में शामिल उमलिंग ला (19,024 फीट) को भी टीम के साथ पार किया था। अब उनका अगला लक्ष्य करीब 19,400 फीट ऊंचे मिगला पास को साइकिल से पार करना है।
