भोपाल। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भोपाल इकाई में आज पांच दिवसीय पूर्ण अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महाप्रबंधक (मानव संसाधन) टी. यू. सिंह द्वारा किया गया।
इस अवसर पर केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो से आए संकाय सदस्य मोहन चंद्र बहुगुणा (सहायक निदेशक) एवं गौतम शर्मा (सहायक निदेशक) विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) सुरेखा बंजोर और प्रबंधक (राजभाषा) पूनम साहू भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।
हिंदी में कार्य करने पर जोर
अपने संबोधन में टी. यू. सिंह ने कहा कि चूंकि हम सभी ‘क’ क्षेत्र में आते हैं, इसलिए हमें अपने प्रत्येक कार्य को हिंदी में करना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों से अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने की अपील करते हुए कहा कि हिंदी में कार्य करने से न केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति बेहतर होती है, बल्कि यह दिल से जुड़ाव भी बनाती है। उन्होंने सभी को अपने कार्यस्थल पर अनुशासन के साथ हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लेने को प्रेरित किया।
अनुवाद कार्य को बताया कला
मोहन चंद्र बहुगुणा ने कहा कि वैश्वीकरण और व्यापार के बढ़ते दायरे के साथ भाषाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने अनुवाद को एक कला बताते हुए कहा कि कार्यालयीन कार्यों में अनुवाद दक्षता से कार्य की गुणवत्ता में सुधार आता है।
प्रशिक्षण से मिलेगी व्यावहारिक सहायता
डॉ. गौतम शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्लांट स्तर पर अनुवाद कार्यों को सुगम बनाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी अपने कार्यस्थलों पर अनुवाद संबंधी समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से कर सकेंगे और हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान देंगे।
संस्कृति संरक्षण में अनुवाद की भूमिका
पूनम साहू ने अपने संबोधन में कहा कि अनुवाद के माध्यम से परंपराओं, मूल्यों और विशिष्ट भाषाओं की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अनुवाद विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद और समझ को सरल बनाता है तथा मूल पाठ के अर्थ और भाव को सटीक रूप में प्रस्तुत करना इसकी सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन पूनम साहू, प्रबंधक (राजभाषा) द्वारा किया गया।
